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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Magh Purnima 2024 Kab Hai Know Date Tithi Subh Muhurat Puja Vidhi And Importance News In Hindi

Magh Purnima 2024: 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा, जानिए इस दिन गंगा स्नान का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Wed, 21 Feb 2024 11:22 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 21 Feb 2024 11:22 AM IST
सार

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। अतः इस दिन गंगाजल का स्पर्श मात्र भी मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति देता है।

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Magh Purnima 2024 Kab Hai Know Date Tithi Subh Muhurat Puja Vidhi And Importance News In Hindi
माघ पूर्णिमा पर सभी देवी-देवता भी प्रयाग में गंगा में स्न्नान करके अपने लोक को लौट जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

24 फरवरी, शनिवार को माघ महीने की पूर्णिमा है। इस तिथि को पुराणों में कल्पवास की पूर्णता का पर्व माना गया है। इस पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने का विधान है। इस दिन गंगा स्न्नान करके कल्पवासी अपनी एक माह की तपस्या करके घर लौटते हैं। जो एक माह तक वहां नहीं रुकते, वे इस एक दिन गंगा स्न्नान करके न केवल पूरे माह का बल्कि वर्षभर का पुण्य लाभ कमा लेते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी देवी-देवता भी प्रयाग में गंगा में स्न्नान करके अपने लोक को लौट जाते हैं। पुराणों का कहना है इस पर्व पर किए गए शुभ कामों से अक्षय पुण्य मिलता है। इसके अलावा माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन वाग्देवी यानि सरस्वती के स्वरूप ललिता महाविद्या की जयंती भी है। होली से एक महीने पूर्व इस पूर्णिमा पर ही होली का डांडा लगाया जाता है, इसलिए इसे होलिका डांडा और रोपणी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

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पूर्णिमा पर गंगा स्नान का धार्मिक महत्व
पदमपुराण के अनुसार अन्य मास में जप, तप, दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने माघ मास में गंगा स्न्नान करने से होते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। अतः इस दिन गंगाजल का स्पर्श मात्र भी मनुष्य को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति देता है। मत्स्य पुराण में वर्णन आया है कि माघ महीने या माघ पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम में स्नान करने से दस तीर्थों के साथ सहस्त्र कोटि तप का पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन गंगा आदि सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप और संताप का नाश होता है। मन और आत्मा की शुद्ध होती है। इस दिन किया गया महास्नान समस्त रोगों का नाश करके दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है। स्नान और दान के वक्त ' ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' का मानसिक जप करते रहना चाहिए। स्नान के बाद पात्र में काले तिल भरकर और साथ में शीत निवारक वस्त्र दान करने से धन और वंश में वृद्धि होती है।  इस दिन पितरों को तर्पण करना बहुत ही फलदायी माना गया है। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और आयु एवं आरोग्य में वृद्धि होती है।
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माघ स्नान का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
माघ पूर्णिमा स्नान को सिर्फ शास्त्रों में ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों ने भी माना है। माघ के महीने में ऋतु परिवर्तन होता है इसलिए नदी के जल में स्नान और सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। दूसरा कारण, चंद्रमा का सम्बन्ध मन से होने के कारण भी यह व्रत मन की पवित्रता और चित्त की शांति के लिए किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आध्यात्मिकता का विकास  होता है।
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