फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Magh Gupt Navratri 2024 Date Time Shubh Muhurat Ghatasthapana Puja Vidhi Importance In Hindi

Magh Gupt Navratri 2024: आज से गुप्त नवरात्रि आरंभ, जानिए महत्व, पूजाविधि और नियम

Sat, 10 Feb 2024 09:28 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 10 Feb 2024 09:28 AM IST
सार

Magh Gupt Navratri 2024: माघ मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि,10 फरवरी शनिवार से गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ हो रहे हैं,जो 18 फरवरी तक रहेंगे। माघ मास में आने वाले गुप्त नवरात्र देवी दुर्गा की पूजा-उपासना के लिए सर्वाधिक प्रशस्त समय है।

विज्ञापन
Magh Gupt Navratri 2024 Date Time Shubh Muhurat Ghatasthapana Puja Vidhi Importance In Hindi
Magh Gupt Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Magh Gupt Navratri 2024: माघ मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि,10 फरवरी शनिवार से गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ हो रहे हैं,जो 18 फरवरी तक रहेंगे। माघ मास में आने वाले गुप्त नवरात्रि देवी दुर्गा की पूजा-उपासना के लिए सर्वाधिक प्रशस्त समय है। इस समय के नवरात्रि में माँ दुर्गा के साथ माँ सरस्वती,माँ लक्ष्मी व माँ काली का भी अर्चन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रों में दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। ये दस महाविद्याएं इस प्रकार है- काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला। दस महाविद्या आदि शक्ति की अवतार मानी जाती हैं और विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठात्री शक्तियां हैं। तंत्र साधना करने वाले इन महादेवियों की पूजा गुप्त रूप से करते हैं इसलिए इनको गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

विज्ञापन


गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी दुखों का नाश होता है। साथ ही साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इन नौ दिनों में साधक महाविद्याओं की देवियों को कठिन भक्ति से प्रसन्न करते हैं। मां प्रसन्न होकर व्यक्ति विशेष की सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करने से धन-धान्य व संतान सुख प्राप्त होता है। साथ ही इन नौ दिनों में विभिन्न 9  शक्तिपीठों के दर्शन करने का भी विधान है। शीला माता,जीर्ण माता,ज्वाला देवी,दधि माता सहित विभिन्न शक्तिपीठों के साथ ही अपनी कुलदेवी के दर्शन करना पुण्यदायी है। वही रामचरितमानस का पाठ व हनुमानजी की उपासना करना बहुत शुभ है,जिससे बल,बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन


गुप्त नवरात्रि पूजाविधि
उपासक को सूर्य उदय से पहले स्न्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। अब लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर चावलों से अष्ट कमल बनाएं एवं उस पर श्री फल रखें। अपनी इष्ट के अनुसार देवी माता की प्रतिमा या चित्र विराजमान करें। पूजा के दौरान माता को रोली,मोली,अक्षत व पुष्प अर्पित करें। लोंग व बताशे का भोग चढाना चाहिए। इसके साथ कलश स्थापना करते समय मां को लाल पुष्प और चुनरी भी अर्पित करें। पूजन के बाद माँ की आरती करें तथा 'सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते' मंत्र का उच्चारण करें। इससे माता जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं और अपने भक्तों के ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुप्त नवरात्रि की पूजा के नियम
गुप्त नवरात्रि पर किए जाने वाली पूजा गुप्त रखी जाती है। इससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है।नवरात्रि के दौरान एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए। भूमि शयन करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।अंतिम अष्टमी या नवमी तिथि कन्या,ब्राह्मण भोज करवाया जाना चाहिए। गुप्त नवरात्रि में काले, बैंगनी, नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

वसंत पंचमी 2024: मां सरस्वती की आराधना के लिए शामिल करें ये पूजन और हवन सामग्री, जानें सम्पूर्ण पूजन विधि

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed