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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Krishna Janmashtami 2023 Vrat Katha Must Read After Krishna Puja To Please God

Krishna Janmashtami 2023: जन्माष्टमी पर पढ़ना ना भूलें श्री कृष्ण के जन्म की ये पावन कथा

Tue, 05 Sep 2023 04:49 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Tue, 05 Sep 2023 04:49 PM IST
सार

Krishna Janmashtami Katha: जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कथा सुनने से कान्हा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Krishna Janmashtami 2023 Vrat Katha Must Read After Krishna Puja To Please God
जन्माष्टमी पर पढ़ना ना भूलें श्री कृष्ण के जन्म की ये पावन कथा - फोटो : iStock

विस्तार

Krishna Janmashtami Katha: इस साल 6 सितंबर को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हर साल कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 2 दिन मनाया जाता है, इसलिए इस साल भी 6 सितंबर को गृहस्थ लोग और 7 सितंबर को वैष्णव लोग जन्माष्टमी मनाएंगे। पुराणों के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण विष्णु जी के अवतार हैं। कहा जाता है कि कंस के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए विष्णु जी ने कृष्ण के रूप में जन्म लिया था। जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कथा सुनने से कान्हा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कृष्ण जन्माष्टमी की कथा... 

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कृष्ण जन्माष्टमी कथा
भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार कंस ने अपने पिता उग्रसेन राजा की राजगद्दी छीन कर जेल में बंद कर दिया और स्वयं को मथुरा का राजा घोषित करेगा। कंस की एक बहन थीं, जिनका नाम देवकी था। वह देवकी से बहुत स्नेह रखता था। कंस ने देवकी का विवाह वासुदेव से कराया। मगर जब वह देवकी को विदा कर रहा था तभी तब आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा। आकाशवाणी सुनकर कंस डर गया और उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया।

इसके बाद क्रूर कंस ने देवकी और वासुदेव की 7 संतानों को मार दिया, लेकिन जब देवकी की आठवीं संतान का जन्म होने वाला था, तब आसमान आसमान में बिजली कड़क रही थी। मान्यता के मुताबिक मध्यरात्रि 12 बजे जेल के सारे ताले खुद ही टूट गए और वहां की निगरानी कर रहे सभी सैनिकों को गहरी नींद आ गई और वो सब सो गए। 

उस समय भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें वासुदेव-देवकी को बताया कि वह देवकी के कोख से जन्म लेंगे। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह उन्हें यानी उनके अवतार को गोकुल में नंद बाबा के पास छोड़ आएं और उनके घर जन्मी कन्या को मथुरा ला कर कंस को सौंप दें। इसके बाद वासुदेव ने भगवान के कहे अनुसार किया।  

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वह कान्हा को नंद बाबा के पास छोड़ आए और गोकुल से लाई कन्या को कंस को सौंप दिया। नंद और यशोदा ने श्रीकृष्ण को पाला और श्री कृष्ण ने कंस का वध किया। जन्माष्टमी के अवसर पर लोग श्री कृष्ण की पूजा करते हैं तथा धूमधाम से इस त्योहार को मनाते हैं।
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