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kharmas 2021: खरमास में क्यों मद्धिम पड़ जाता है सूर्य का तेज, जानिए इसके पीछे का कारण

Thu, 25 Nov 2021 03:53 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Thu, 25 Nov 2021 03:53 PM IST
सार

इस बार 16 दिसंबर 2021 से लेकर 14 जनवरी 2022 तक खरमास रहेगा। खरमास के दौरान सूर्य का तेज मद्धिम पड़ जाता है इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि खरमास में क्यों मद्धिम पड़ जाता है सूर्य का तेज...

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kharmas 2021 start date why shubh manglik  rituals are stop during kharmas katha know the story of kharmas
Kharmas 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष में दो बार खरमास लगता है। ज्योतिष में बारह राशियां बताई गई हैं। इन बारह राशियों में सूर्य मार्गी होते हुए भ्रमण करते हैं और हर एक माह के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। इस तरह से जब सूर्य बारह राशियों में मार्गी होते हुए देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो वह अवधि खरमास कहलाती है। इस दौरान सभी मांगलिक कार्यों शादी, सगाई, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश, मुंडन आदि पर रोक रहती है। इसके साथ ही इस माह में मकान व वाहन खरीद आदि भी करना शुभ नहीं माना जाता है। इस बार 16 दिसंबर 2021 को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास आरंभ जाएगा। खरमास का समापन 14 जनवरी 2022 को होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य का तेज मद्धिम पड़ जाता है इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। तो चलिए जानते हैं कि खरमास में क्यों मद्धिम पड़ जाता है, सूर्य का प्रकाश।

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इसलिए मद्धिम पड़ जाता है सूर्य का तेज-
धार्मिक ग्रंथो में वर्णन मिलता है कि सूर्यदेव अपने सात घोड़ों से जुड़े रथ पर ब्रह्मांड की परिक्रमा अनवरत करते रहते हैं। खरमास को लेकर मिलने वाली पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय लगातार चलने के कारण सूर्यदेव के रथ में लगे घोड़े थक जाते हैं। तब सूर्य देव उनकी प्यास बुझाने के लिए उन्हें एक तालाब पर ले जाते हैं लेकिन तब समस्या आती है कि यदि घोड़े पानी पीने लगे तो रथ रुक जाएगा जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ जाएगा। तब सूर्यदेव को वहीं पर दो खर यानी गधे दिखाई देते हैं। सूर्यदेव अपने अश्वों को विश्राम के लिए छोड़कर दोनों गधों को रथ में जोड़कर देते हैं और ब्रह्मांड का चक्कर काटने लगते हैं। सूर्य देव के रथ का संचालन सात अश्वों के बजाय दो गधों के द्वारा होने के कारण रथ की गति धीमी हो जाती है। इस प्रकार से माना जाता है कि इस दौरान उनका तेज मद्धिम पड़ जाता है। सूर्यदेव दोनों गधों के सहारे एक मास चक्र पूरा करते हैं। इस समय तक तक उनके घोड़े विश्राम कर चुके होते हैं और पुनः सूर्यदेव का रथ तेज गति से चलने लगता है। 
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इसलिए कहा जाता है खरमास-
खरमास की कथा के अनुसार, एक माह तक सूर्यदेव के रथ का संचालन गधे (जिसे 'खर' भी कहा जाता है) के द्वारा किया जाता है। इसलिए इस एक माह की अवधि को खरमास कहते हैं।
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