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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Kartik Maas 2024 Start Date Importance Do These Measures During Kartik Month For Happiness and Prosperity

Kartik Maas 2024: 18 अक्टूबर से कार्तिक मास प्रारंभ, जानिए महत्व और नियम

Thu, 17 Oct 2024 12:05 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 17 Oct 2024 12:05 PM IST
सार

धार्मिक दृष्टिकोण से कार्तिक मास के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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Kartik Maas 2024 Start Date Importance Do These Measures During Kartik Month For Happiness and Prosperity
कार्तिक माह में दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना का महत्व है - फोटो : freepik

विस्तार

Kartik Maas 2024: धर्मग्रंथों में कार्तिक मास को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। इस महीने में विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना का महत्व है, क्योंकि इसे उनका प्रिय महीना माना जाता है। ब्रह्माजी ने नारदजी को कार्तिक मास की महिमा बताते हुए कहा है कि कार्तिक मास सब मासों में उत्तम है एवं महीनों में कार्तिक, देवताओं में भगवान विष्णु और तीर्थों में नारायण तीर्थ (बद्रिकाश्रम)श्रेष्ठ है।'न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समं युगं, न वेदं सदृशं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समं' अर्थात् कार्तिक के समान कोई मास नहीं है, न सतयुग के समान कोई युग, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं।इस महीने में तेंतीस कोटि देवता मनुष्य के सन्निकट हो जाते हैं और इसमें किए हुए स्न्नान,दान,भोजन,व्रत,तिल,धेनु,सुवर्ण,रजत,भूमि,वस्त्र आदि के दानों को विधिपूर्वक ग्रहण करते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से कार्तिक मास के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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कार्तिक माह में स्नान का महत्व
कार्तिक मास में प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करने का अत्यधिक महत्व होता है। विशेष रूप से गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना पुण्यकारी माना जाता है। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। यह स्नान शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।
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दीपदान का नियम
कार्तिक मास में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सूर्यास्त के समय घर के बाहर, तुलसी के पौधे के पास और मंदिरों में दीप जलाने से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। दीपदान का धार्मिक महत्व यह है कि यह अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। इसे जीवन में समृद्धि और शांति लाने वाला माना गया है।
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सात्विक आहार और संयम
इस मास में सात्विक जीवन शैली अपनाने का विशेष महत्व है। भोजन में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का त्याग करना आवश्यक होता है। शुद्ध और सात्विक आहार जैसे फल, दूध, और सादा भोजन का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, मन, वाणी, और कर्म में संयम बरतने से व्यक्ति की आत्मिक उन्नति होती है। इस दौरान ध्यान और मौन व्रत का पालन करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

ध्यान और साधना
कार्तिक मास को ध्यान और साधना के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु और शिव का ध्यान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक मास में ध्यान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मास में मौन साधना या जप साधना का भी विशेष महत्व होता है।


दान और सेवा
कार्तिक मास में दान करने से हजारों गुना पुण्य प्राप्त होता है। गरीबों, ब्राह्मणों, और जरुरतमंदों को दान देना इस मास का मुख्य नियम है। विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, और दीपों का दान करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।

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