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रक्षाकवच है कलाई पर बंधा कलावा, जानें किस हाथ में कैसे बंधवाएं
Wed, 15 Apr 2020 03:00 PM IST
योगेश जोशी
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 15 Apr 2020 03:00 PM IST
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नई वस्तु खरीदने पर हम कलावा जरूर बांधते हैं। कोई भी धार्मिक अनुष्ठान कलावा (रक्षासूत्र, मोली) के बिना संपन्न नहीं होता है। हाथ में कलावा बंधवाने का सिर्फ धार्मिक ही नहीं, वैज्ञानिक महत्व भी है।
जीवन में शुभता प्रदान करता है कलावा
- हाथ में कलावा बांधना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा शुभता प्रदान करता है।
संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक
- कलावा को संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कलावा बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु व महेश एवं त्रिदेवियां- लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।
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vishnu
- फोटो : vishnu
कलावा बांधने की प्रथा
- कलावा बांधने की प्रथा काफी पुरानी है, धार्मिक कथाओं के अनुसार सबसे पहले वामन भगवान ने दानवीर राजा बली की अमरता के लिए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। वामन भगवान श्री हरि विष्णु जी के अवतार थे।
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कलावा बांधते वक्त इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
- आज भी विद्वान लोग कलावा बांधते वक्त इस मंत्र का उच्चारण करते हैं
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।