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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   International Yoga Day 2021 know importance of Yoga in spiritual way

International Yoga Day 2021: आध्यात्मिक दर्शन से समझें योग का महत्व, क्यों है इसकी आवश्यकता

Mon, 21 Jun 2021 06:38 AM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 21 Jun 2021 06:38 AM IST
सार

योग का अर्थ जोड़ने से लिया जाता है लेकिन आध्यात्मिक रूप से यह स्वयं को स्वयं से जोड़ने की ही प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति खुद के भीतर झांककर अपना आत्मावलोकन कर सकता है। 

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International Yoga Day 2021 know importance of Yoga in spiritual way
विश्व योग दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ज्योतिष शास्त्र में योग उन शुभाशुभ अवसरों को कहा जाता है जिनका निर्माण आपकी कुंडली के अनुसार ग्रहों की दशा से होता है। योग का अर्थ जोड़ने से लिया जाता है लेकिन आध्यात्मिक रूप से यह स्वयं को स्वयं से जोड़ने की ही प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति खुद के भीतर झांककर अपना आत्मावलोकन कर सकता है। 

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योग हमें शारीरिक रूप से तो स्वस्थ रखता ही है। साथ ही योग से हमें एक आंतरिक ऊर्जा भी मिलती है। जिससे हमारे अंदर एक गजब का साहस पैदा होता है, हम संयम रखना सीखते हैं, एकाग्र होना सीखते हैं। आवेश, क्रोध आदि विकारों पर नियंत्रण रखना सीखते हैं। 
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ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि योग दुनिया के लिए भले ही यह बेहतर सेहत के लिए किया जाने वाला एक उपाय हो लेकिन भारत में योग स्वयं को स्वयं से जोड़ने की एक प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है। एक ऐसी क्रिया जिसके माध्यम से इंसान अपने भीतर झांक पाता है। 
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योग से भारत के आध्यात्मिक दर्शन के तार गहरे से जुड़े हैं। भारत से आरंभ हुई योग की इस परंपरा को पूरी दुनिया ने हाथों हाथ लिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाने की मान्यता देकर योग के महत्व व योग की प्रासंगिकता को जाहिर किया है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से 2015 से प्रत्येक वर्ष 21 जून को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहां व्यक्ति के लिए चैन की सांस लेना दूभर हो चुका है, जहां हवा के साथ हर क्षण हम जहर को अपने अंदर खींच रहे हैं, जहां अनेक किस्म की नई-नई बिमारियों से हमारा वास्ता पड़ रहा है ऐसे में योग से बेहतर उपचार कहां मिल सकता है। 

बीमारियों के फैलने का मुख्य कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना होता है। लगातार योगाभ्यास से हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसलिए योग का महत्व वर्तमान में बहुत अधिक है। योग दिवस मनाने की आवश्यकता इसी से समझी जा सकती है कि वर्तमान में भारतीय समाज की जीवन शैली आधुनिकता के नाम पर लगातार पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होती जा रही है।

वहीं दुनिया अपने विकास के लिए भारतीय मूल्यों को अपना रही है। ऐसे में आवश्यकता है कि जो लोग अपने मूल्यों को नज़रदांज या मूल्यहीन मानने लगे हैं उन्हें समय की नज़ाकत व योग की अहमियत का अहसास करवाया जाए। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत ही योग का जनक है लेकिन यह सवाल हर किसी के जहन में हो सकता है कि आखिरकार योग की शुरुआत कब हुई? 

पूरी दुनिया ने योग को भले ही 2015 से एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाना शुरु किया हो लेकिन योग का इतिहास योग की कहानी बहुत ही प्राचीन है इतना प्राचीन जितनी की दुनिया है। कहते हैं आदियोगी भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग की शिक्षा दी उन्होंने ही समस्त सृष्टि में योग का प्रचार-प्रसार किया। 


भगवान के भिन्न-भिन्न अवतारों विशेषकर भगवान श्री कृष्ण जिन्हें योगेश्वर, योगी भी कहा जाता है, भगवान महावीर, भगवान बुद्ध आदि ने अपनी-अपनी तरह से इसे विस्तार रूप दिया। लेकिन वर्तमान में जिस योग से हम परिचित हैं उसे लगभग 200 ई. पू. महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र नामक ग्रंथ में व्यवस्थित रूप दिया बाद में सिद्ध, शैव, नाथ, वैष्णव और शाक्त आदि संप्रदायों ने विस्तार दिया। ऋग्वेद, ऋक्संहिता आदि ग्रंथों में भी योग संबंधी मंत्र प्राप्त होते हैं।

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