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सुबह-शाम दीपक जलाने के हैं बहुत फायदे, जानिए नियम

Wed, 30 Sep 2020 06:34 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 30 Sep 2020 06:34 AM IST
सार

  • चार्तुमास, पूरे अधिकमास या अधिकमास की पूर्णिमा के दिन मंदिर या पवित्र नदियों के किनारे दीपदान करने वाला मनुष्य विष्णु लोक को प्राप्त होता है।

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importance of deepak in hindu dharm
प्रकाश की पूजा को परमात्मा की पूजा भी माना गया है। - फोटो : Social Media

विस्तार

प्रत्येक शुभ कार्य, चाहे वह पूजा-पाठ, सांस्कृतिक उत्सव या कोई भी त्योहार क्यों न हो, सभी की शुरुआत दीप प्रज्वलित करने से ही होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार अग्नि पृथ्वी पर सूर्य का बदला हुआ रूप है। मान्यता है कि अग्निदेव को साक्षी मानकर उसकी  मौजूदगी में किए गए कार्य अवश्य सफल होते हैं। प्रकाश ज्ञान का प्रतीक भी है, 'ईश्वर' प्रकाश और ज्ञान -रूप में ही हर जगह व्याप्त हैं। ज्ञान प्राप्त होने से अज्ञान रुपी मनोविकार दूर होते हैं जीवन के कष्ट मिटते हैं। इसलिए प्रकाश की पूजा को परमात्मा की पूजा भी माना गया है।

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पूर्णिमा पर दीपदान
अग्नि पुराण के अनुसार जो मनुष्य मंदिर अथवा ब्राह्मण के घर में एक वर्ष तक दीप दान करता है वह सब कुछ प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार चार्तुमास, पूरे अधिकमास या अधिकमास की पूर्णिमा के दिन मंदिर या पवित्र नदियों के किनारे दीपदान करने वाला मनुष्य विष्णु लोक को प्राप्त होता है। इसके अलावा ऐसा भी माना जाता है कि जब तक दीपक जलता है, तब तक भगवान स्वयं उस स्थान पर उपस्थित रहते है इसलिए वहां पर मांगी गई मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। 
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दीपक से हमें  जीवन के उर्ध्वगामी होने, ऊंचा उठने और अन्धकार को मिटा डालने की प्रेरणा मिलती है। इसके अलावा दीप ज्योति से  समस्त पाप नष्ट होकर जीवन में सुख-समृद्धि,आयु, आरोग्य एवं सुखमय जीवन में वृद्धि होती। गाय के घी का दीपक जलाने से आसपास का वातावरण रोगाणु मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है। पूजा अर्चना करते वक्त दीपक जलाने के पीछे भी यही उद्देश्य होता है कि प्रभु हमारे मन से अज्ञान रुपी अन्धकार को दूर करके ज्ञान रुपी प्रकाश प्रदान करें।
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सकारात्मक ऊर्जा देता है दीपक
किसी भी पूजा अथवा त्योहार पर घी या तेल के दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, घर के सदस्यों को प्रसिद्धि मिलती है। वास्तु नियमों के अनुसारअखंड दीपक पूजा स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए, इस दिशा में दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। 


दीपक की लौ के संबंध मान्यता है कि उत्तरदिशा की ओर लौ रखने से स्वास्थ्य और प्रसन्नता बढ़ती है,पूर्व दिशा की ओर लौ रखने से आयु की वृद्धि होती है।

ध्यान रखें कि यदि मिट्टी का दीप जला रहें हैं तो दीप साफ और साबुत हो। किसी भी पूजा में टूटा हुआ दीपक अशुभ और वर्जित माना गया है। 

दीपक जलाने के बारे में कहा जाता है कि सम संख्या में जलाने से ऊर्जा का संवहन निष्क्रिय हो जाता है,जब कि विषम संख्या में दीपक जलाने पर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है।यही वजह है कि धार्मिक कार्यों में हमेशा विषम संख्या में दीपक जलाए जाते हैं।  

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