Hanuman Chalisa Path: हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से दूर हो जाते हैं बड़े से बड़ा संकट, जानें चौपाइयों का महत्व
Hanuman Chalisa Path Benefits: हनुमान चालीसा पाठ का नियमित जाप करने पर मन की शांति, सुख समृद्धि और व्यक्ति के मन से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर होती है और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
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विस्तार
1. "जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।"
लाभ:
इस चौपाई का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह छात्रों और विद्या प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
2. "बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।"
लाभ:
इस चौपाई को पढ़ने से मानसिक भ्रम दूर होता है और व्यक्ति आत्मविश्वास से भर जाता है। यह ध्यान और निर्णय क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।
3. "राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।"
लाभ:
जो लोग शारीरिक और मानसिक कमजोरी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह चौपाई अत्यंत लाभकारी है। यह ऊर्जा और साहस प्रदान करती है।
4. "महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।"
लाभ:
यह चौपाई नकारात्मक विचारों को दूर करती है और सकारात्मकता का संचार करती है। जिन लोगों को आत्म-संदेह है, वे इसे पढ़कर आत्मबल प्राप्त कर सकते हैं।
5. "संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।"
लाभ:
किसी भी संकट और परेशानी के समय इस चौपाई का पाठ अद्भुत लाभ देता है। यह हनुमानजी की कृपा से समस्याओं को हल करने की शक्ति प्रदान करता है।
6. "भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे।"
लाभ:
इस चौपाई का पाठ नकारात्मक ऊर्जाओं, भूत-प्रेत और किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाता है। यह घर और मन दोनों को शांत और सुरक्षित रखती है।
7. "नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।"
लाभ:
यह चौपाई स्वास्थ्य लाभ के लिए अत्यधिक प्रभावशाली है। गंभीर बीमारियों से बचने और स्वास्थ्य सुधारने के लिए इसका पाठ उपयोगी है।
8. "अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता।"
लाभ:
जो व्यक्ति भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि चाहता है, उसके लिए यह चौपाई चमत्कारिक है। यह आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति लाने में मदद करती है।
9. "राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।"
लाभ:
इस चौपाई का पाठ भगवान राम और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का मार्ग है। यह भक्ति और आंतरिक संतोष प्रदान करती है।
10. "जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महासुख होई।"
लाभ:
इस चौपाई के अनुसार, हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन के सभी बंधनों से मुक्ति मिलती है। यह मोक्ष और परम सुख की ओर ले जाती है।
हनुमान चालीसा
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज
निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु
जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार........
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रछक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।