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गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस 2018: धर्म की रक्षा करते हुए ऐसे शहीद हुए थे गुरु तेग बहादुर
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:53 AM IST
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गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस 2018
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सिखों के नवें गुरु, गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस 24 नवंबर 2018 को है। प्रेम, त्याग और बलिदान के प्रतीक गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। विश्व इतिहास में धर्म और मानवीय मूल्यों,आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय रहा है। गुरु तेग बहादुर का जन्म अमृतसर में गुरु हरगोबिन्द साहिब जी के घर हुआ था। बचपन में उनका नाम त्यागमल था।
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सिखों के नवें गुरु, गुरु तेग बहादुर को धर्म और आदर्शों के लिए शहीद होने वाले महापुरुषों में गिना जाता है। गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों की मदद के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर जी को मौत की सजा सुनाई थी क्योंकि गुरु तेग बहादुर ने इस्लाम धर्म को मानने से इंकार कर दिया था। इसके बाद मुगल शासक औरंगजेब ने सबके सामने उनका सिर कलम कर दिया था। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी। गुरु तेगबहादुर की याद में उनके शहीदी स्थल पर जो गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा शीश गंज साहिब है।
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यह गुरुजी के निर्भय आचरण, धार्मिक अडिगता और नैतिक उदारता का उच्चतम उदाहरण था। गुरुजी मानवीय धर्म एवं वैचारिक स्वतंत्रता के लिए अपनी महान शहादत देने वाले एक क्रांतिकारी युग पुरुष थे। गुरु जी ने धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए कई जगहों की यात्राएं की।
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