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गुरुवाणी: संतो की वाणी है गुरु ग्रंथ साहिब, कबीर जी के भी हैं 224 शबद
Mon, 11 Nov 2019 04:51 PM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Mon, 11 Nov 2019 04:51 PM IST
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गुरुग्रन्थ साहिब की भाषा सरल है और जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करती है
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गुरुग्रन्थ साहिब सिख संप्रदाय का प्रमुख धर्मग्रंथ है। इसका संपादन सिख सम्प्रदाय के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा किया गया। 16 अगस्त 1604 को हरिमंदिर साहिब अमृतसर में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ था। गुरु ग्रंथ साहिब में कुल 1430 पृष्ठ हैं।
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गुरुग्रन्थ साहिब में सभी धर्मों की वाणी सम्मलित है। इसमे जयदेवजी परमानंदजी जैसे ब्राह्मण भक्तों की वाणी है। साथ ही कबीर, रविदास, नामदेव, सैण जी, सघना जी, छीवाजी, धन्ना की वाणी भी सम्मिलित है। पांचो वक्त की नमाज अदा करने वाले शेख फरीद के श्लोक भी गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं। इसकी भाषा सरल है और जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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गुरु ग्रंथ साहिब में कर्म करने को अधिक महत्त्व दिया गया है। सिखों के इस ग्रंथ के अनुसार व्यक्ति अपने कर्मो के अनुसार ही महत्व पाता है ओर कर्म ही उसके जीवन का फैसला करते हैं। गुरुवाणी के अनुसार भगवान का वास व्यक्तियों के हृदय में होता है। गुरुवाणी मधुर व्यवहार और विनम्र शब्दों के द्वारा हर हृदय को जीतने की सीख देती है। गुरुवाणी ब्रह्मज्ञान से उपजी आत्मिक शक्ति को लोककल्याण के लिए प्रयोग करने की प्रेरणा देती है।
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गुरु ग्रंथ साहिब में संतो की वाणी
| संत वाणी | शबद |
| कबीर दास | 224 |
| नामदेव | 61 |
| संत रविदास | 40 |
| भगत त्रिलोचन जी | 4 |
| फरीद जी | 4 |
| भगत बैणी जी | 3 |
| भगत धंना जी | 3 |
| भगत जयदेव जी | 2 |
| भगत भीखन जी | 2 |
| सूरदास | 1 |
| भगत परमानन्द जी | 1 |
| भगत सैण जी | 1 |
| पीपाजी | 1 |
| भगत सधना जी | 1 |
| रामानन्द | 1 |
| गुरु अर्जन देव | 3 |