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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Ganga Saptami 2025 Know the importance of worship method and bathing from auspicious time

Ganga Saptami 2025: किस दिन मनाई जाएगी गंगा सप्तमी? जानें शुभ मुहूर्त से लेकर पूजा विधि और स्नान का महत्व

Mon, 07 Apr 2025 12:49 PM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीक्षा पाठक Updated Mon, 07 Apr 2025 12:49 PM IST
सार

Saptami Tithi: इस साल यह पावन पर्व शनिवार, 3 मई 2025 को मनाया जाएगा। तो आज की इस खबर में हम आपको गंगा सप्तमी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही हम यह भी बताएंगे गंगा सप्तमी के पीछे कौन सी पौराणिक कथा शामिल है। आइए जानते हैं।

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Ganga Saptami 2025 Know the importance of worship method and bathing from auspicious time
कब है गंगा सप्तमी? - फोटो : freepik.com

विस्तार

हर नदी सिर्फ जलधारा होती है, लेकिन गंगा सिर्फ नदी नहीं, बल्कि आस्था की अमृतधारा है। कहा जाता है कि जब पापों से थकी धरती ने शुद्धि की गुहार लगाई, तब स्वर्गलोक से मां गंगा ने कदम रखा हमारी धरती पर। और यही क्षण आज भी गंगा सप्तमी के रूप में मनाई जाती है। हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व है। इस खास अवसर पर लोग पावन और पवित्र गंगा नदी में स्नान कर के अपने सारे पापों से निजात पाते हैं। इसके साथ ही मां गंगा की पूजा अर्चना करते हैं। इस साल यह पावन पर्व शनिवार, 3 मई 2025 को मनाया जाएगा। तो आज की इस खबर में हम आपको गंगा सप्तमी की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही हम यह भी बताएंगे गंगा सप्तमी से जुड़ी कौन सी पौराणिक कथा शामिल है। आइए जानते हैं।
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 तिथि और शुभ मुहूर्त
गंगा सप्तमी 3 मई को सुबह 7:51 बजे से शुरू होकर 4 मई को सुबह 7:18 बजे खत्म होगी। ऐसे में आपको भ्रमित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप 3 मई को ही पूजा अर्चना कर सकते हैं। पूजन का सही समय सुबह 10:58 से दोपहर 1:38 बजे तक है। यह वही समय है जब मां गंगा की उपासना, स्नान और दान का पुण्य कई गुना फलदायी होता है।
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क्या है गंगा सप्तमी से जुड़ी कथा?
गंगा सप्तमी को गंगा जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन स्वर्ग से धरती पर गंगा का दिव्य अवतरण हुआ था। ब्रह्मा द्वारा जन्मी, शिव की जटाओं में समाई और भगीरथ की तपस्या से बहती हुई  गंगा साक्षात मोक्ष का मार्ग बन गईं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और आत्मा को शांति व मुक्ति मिलती है।
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स्नान करने के बाद दान-पुण्य भी करें
गंगा सप्तमी पर स्नान का विशेष महत्व है। अगर आप प्रयागराज, हरिद्वार, ऋषिकेश या वाराणसी जैसे पवित्र तीर्थों में हैं, तो गंगा में डुबकी जरूर लगाएं। अगर गंगा तक पहुंचना संभव नहीं हो, तो घर में स्नान करते समय जल में कुछ बूंदें गंगाजल की मिला लें। हालांकि, कहा जाता है कि भावनाओं की पवित्रता ही सबसे बड़ा तप है। स्नान के बाद तिल, वस्त्र, अन्न, दक्षिणा आदि का दान करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

 दीपकों से की जाती है मां गंगा की आरती
गंगा सप्तमी पर गंगा घाटों पर एक अलग ही उल्लास देखने को मिलता है। हजारों दीपों से सजी गंगा आरती, मंत्रोच्चारण और शंख ध्वनि से गूंजते घाट। सब मिलकर एक ऐसा अनुभव रचते हैं, जो आत्मा तक को झकझोर देता है। भक्तजन इस दिन मां गंगा की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और विशेष मंत्रों का जाप करते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्चा मोक्ष केवल गंगा में डुबकी से नहीं, बल्कि अपने कर्मों को पवित्र करने से मिलता है।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 
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