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Ganga Saptami 2024 Date: गंगा सप्तमी आज,जानें शुभ मुहूर्त, महत्व, कथा और पूजा विधि

Tue, 14 May 2024 06:26 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 14 May 2024 06:26 AM IST
सार

Ganga Saptami 2024: गंगा सप्तमी का हिंदुओं में बहुत महत्व है। गंगा को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना जाता है। देवी गंगा को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे शुभ्रा, गंगे भागीरथी और विष्णुपदी। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया।  तब सभी देवताओं और भागीरथ ने ऋषि जह्नु से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया। इसके बाद  गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है।

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Ganga Saptami 2024 Date Time Shubh Muhurat Mahatv katha Puja Vidhi in hindi
गंगा सप्तमी 2024 - फोटो : amar ujala

विस्तार

Ganga Saptami 2024 Date: आज यानी 14 मई मंगलवार को गंगा सप्तमी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन को गंगा जयंती के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गंगा सप्तमी वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। गंगा सप्तमी को उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में, गंगा नदी पवित्र नदियों में से एक है। जिनकी आराधना देवी के रूप में की जाती है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि देवी गंगा को समर्पित है। इसे जाह्नु सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है। 

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गंगा सप्तमी 2024: तिथि और मुहूर्त 

सप्तमी तिथि प्रारंभ – 13 मई, 2024 को शाम 05:20 बजे
सप्तमी तिथि समाप्त – 14 मई, 2024 को शाम 06:49 बजे

गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त – सुबह 11:26 बजे से दोपहर 02:19 बजे तक
अवधि – 02 घंटे 53 मिनट



गंगा सप्तमी 2024: महत्व
गंगा सप्तमी का हिंदुओं में बहुत महत्व है। गंगा को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना जाता है। देवी गंगा को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे शुभ्रा, गंगे भागीरथी और विष्णुपदी। विष्णुपदी नाम इसीलिए पड़ा  क्योंकि वह पहली बार भगवान विष्णु के चरणों से निकली थीं। ऐसा माना जाता है कि गंगा के पानी में किसी भी बीमारी से व्यक्ति को ठीक करने की शक्ति होती है। जो भक्त गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाते हैं, उन्हें पिछले पापों से मुक्ति मिलती है। गंगा जल नकारात्मकता से बचाता है और यह शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। भक्त शिवलिंग अभिषेक के लिए गंगा जल का उपयोग करते हैं। गंगा जल का उपयोग मृत लोगों की अस्थियों को विसर्जित करने में भी किया जाता है ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। 
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गंगा सप्तमी 2024: कथा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवी गंगा पहली बार गंगा दशहरा के दिन धरती पर उतरी थीं, लेकिन ऋषि जह्नु ने सारा गंगा जल पी लिया।  तब सभी देवताओं और भागीरथ ने ऋषि जह्नु से गंगा को छोड़ने का अनुरोध किया। इसके बाद  गंगा सप्तमी के दिन देवी गंगा फिर से धरती पर आईं और इसीलिए इस दिन को जह्नु सप्तमी भी कहा जाता है।
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गंगा सप्तमी से जुड़ी एक और कहानी है, एक बार, कोसल के राजा भागीरथ परेशान थे क्योंकि उनके पूर्वज बुरे कर्मों के पापों से पीड़ित थे। भागीरथ चाहते थे कि वे इससे मुक्त हों, इसलिए उन्होंने भगवान ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आश्वासन दिया कि गंगा पृथ्वी पर आएंगी, उनके पूर्वजों की आत्मा को शुद्ध करेंगी। लेकिन वह जानते थे कि देवी गंगा का प्रवाह सब कुछ नष्ट कर सकता है, तब ब्रह्मा जी ने भागीरथ को भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा क्योंकि वे ही गंगा के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं।  इसलिए उन्होंने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और इस शुभ दिन देवी गंगा पृथ्वी पर उतरीं, इसलिए गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है।

गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान और इसके बाद की पूजा विधि 

  • गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में  उठकर सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं।
  • फिर गंगा नदी में स्नान करें और यदि नदी में स्नान संभव न हो तो गंगाजल नहाने के पानी में मिलाएं।
  • गंगा नदी में स्नान के समय सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य दें।
  • सूर्य अर्घ्य के बाद भगवान शिव का ध्यान कर उनके मंत्रों का जाप करें।
  • फिर 'हर हर गंगे' का उच्चारण करते हुए नदी में क्षमता अनुसार डुबकी लगाएं।
  • संभव हो तो तीन डुबकी अवश्य लगाएं। इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • मां गंगा को दूध चढ़ाएं। फिर मां गंगा को धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
  • मां गंगा को गेंदे के फूल की माला अर्पित करें।
  • नदी में खड़े-खड़े मां गंगा के मंत्रों का जाप करें।
  • गंगा स्तोत्र का पाठ भी करें और मां गंगा से प्रार्थना करें।
  • मां गंगा को सफेद रंग की मिठाई या अन्य खाद्य का भोग लगाएं।
  • मां गंगा की आरती उतारें और क्षमता अनुसार दान करें।
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