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Ganga Dussehra 2022: गंगा दशहरा आज, जानिए गंगाजी में स्नान और दान का धार्मिक महत्व

Thu, 09 Jun 2022 07:42 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 09 Jun 2022 07:42 AM IST
सार

गंगा दशहरा तन के साथ-साथ मन की शुद्धि का पर्व भी हैं, इसलिए इस दिन गंगाजी में खड़े होकर अपनी पूर्व में की हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए और भविष्य में कोई भी बुरा कार्य नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए।
 

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Ganga Dussehra 2022 Importance of Ganga Bath And Significance Ganga Dussehra Story
Ganga Dussehra 2022: मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है एवं गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ganga Dussehra 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में जन-जन के हृदय में बसी मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। अत:इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है ,जो इस बार 10 जून को है। इस दिन गंगा में स्नान एवं दान करने से प्राणी के सब दुःख दूर हो जाते हैं। गंगा दशहरा तन के साथ-साथ मन की शुद्धि का पर्व भी हैं, इसलिए इस दिन गंगाजी में खड़े होकर अपनी पूर्व में की हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए और भविष्य में कोई भी बुरा कार्य नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए।

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गंगा स्नान का महत्व
मां गंगा शुद्ध,विद्यास्वरूपा,इच्छाज्ञान एवं क्रियारूप,दैहिक,दैविक तथा भौतिक तापों को शमन करने वाली,धर्म,अर्थ,काम एवं मोक्ष चारों पुरूषार्थों को देने वाली शक्ति स्वरूपा हैं। कहा गया है-'गंगे तव दर्शनात मुक्तिः'अर्थात निष्कपट भाव से गंगाजी के दर्शन मात्र से जीवों को कष्टों से मुक्ति मिलती है और वहीं गंगाजल के स्पर्श से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार पाठ,यज्ञ,मंत्र,होम और देवार्चन आदि समस्त शुभ कर्मों से भी जीव को वह गति नहीं मिलती,जो गंगाजल के सेवन से प्राप्त होती है। गंगा पूजन एवं स्नान से रिद्धि-सिद्धि,यश-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों का क्षय होता है। 
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मान्यता है कि गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है एवं गंगा स्नान करने से अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त होता है। विधिविधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है। अमावस्या दिन गंगा स्नान और पितरों के निमित तर्पण व पिंडदान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। मत्स्य,गरुड़ और पद्म पुराण के अनुसार हरिद्वार,प्रयाग और गंगा के समुद्र संगम में स्नान करने से मनुष्य मरने के बाद स्वर्ग पहुंच जाता है और फिर कभी पैदा नहीं होता यानी उसे निर्वाण की प्राप्ति हो जाती है।
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दशमी तिथि को दस चीजों का दान
स्कंद पुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालुजन दस-दस सुगंधित पुष्प,फल,नैवेद्य,दस दीप और दशांग धूप के द्वारा श्रद्धा और विधि के साथ दस बार गंगाजी की पूजा करें। जिस भी वस्तु का दान करें,उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें,उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए। ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है एवं मां गंगा प्रसन्न होकर मनुष्य को पापों से मुक्त करती हैं। दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को देनी चाहिए। जब गंगा नदी में स्नान करें,तब दस बार डुबकी लगानी चाहिए। गंगा नदी के किनारे दीप दान करने से व्यक्ति की  मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन स्नान-दान करने से शरीर शुद्ध और मानसिक विकारों से रहित होता है। अमृतदायिनी मां गंगा को छू लेने से ही मृत्युलोक के जीवों का उद्धार होने और उन्हें मुक्ति मिल जाने की मान्यता इस पर्व को लेकर है।

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