सोमवार से शुरू हो रहा गणेश जी का माह, जानिए क्या है खास
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श्रीगणेश आराधना का पावन माह भादों 11 अगस्त सोमवार से आरंभ हो रहा है। श्रावण शिव आराधना का फल अमोघ है उसी तरह भादों गणेश की पूजा के लिए सर्वोपरि है। इस बार भादों में घर में गणेश की मूर्ति बिठाना, उनकी पूजा करना विशेष फलदायी रहेगा।
इसलिए खास है गणेश जी की पूजा
वर्तमान संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों का अधिकार चंद्रमा के पास है। यह मन, माता, मित्र, मकान, मानसिक सुख-तनाव आदि के स्वामी हैं। चंद्र और गणेश सर्वदा साथ-साथ ही रहते हैं, इसलिए विद्यार्थियों, अन्य प्रतियोगिताओं में बैठने वाले युवकों के लिए गणेश पूजा शुभ है।
गणेशजी का जन्म भादों की शुक्लपक्ष चतुर्थी को हुआ। उस समय सोमवार को स्वाति नक्षत्र की सिंह लग्न और अभिजित मुहूर्त था। गणेशजी के जन्म के समय सभी शुभग्रह कुंडली में पंचग्रही योग बनाए हुए थे।
एक-एक बूंद अमृततुल्य
जल तत्व के स्वामी गणेश का स्वाति नक्षत्र में जन्म होने के कारण इस नक्षत्र में बारिश की एक-एक बूंद अमृततुल्य मानी गई है। जो वृक्षों, वनस्पतियों औषधियों, और फसलों के लिए वरदान है।
गांवों में किसान इस नक्षत्र पर सूर्य की यात्रा के मध्य वर्षा की अत्यधिक कामना करते हैं। यह नक्षत्र धान की फसलों के लिए तो अमृत तुल्य है ही, गेहूं की फसल भी रोग रहित होती है।
गणेश पूजा के लाभ
गणपति चारों देवों सहित पंचायतन में पूज्य हैं। जैसे सृष्टि का कोई भी शुभ-अशुभ कार्य जल के बिना पूर्ण नहीं होता, वैसे ही गणेश पूजन के बिना कोई भी जप-तप, अनुष्ठान आदि कर्म पूर्ण नहीं होता।
कल्याण के लिए गणेश पाश, अंकुश और वरमुद्रा धारण करते हैं। पाश मोह का प्रतीक है जो तमोगुण प्रधान है, रजोगुण प्रधान अंकुश वृत्तियों का प्रतीक है।
वरमुद्रा सत्वगुण का प्रतीक है जो आत्मसाक्षात्कार कराकर परम पद दिलाते हुए परमेश्वर का दर्शन भी कराता है। इनका पूजन करके प्राणी तमोगुण, रजोगुण से मुक्त होकर सतोगुणी हो जाता है।