फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   dhanteras puja yam deepak

धनतेरस पर एक दीपक जलाना जरूरी क्यों?

Fri, 01 Nov 2013 01:02 PM IST
टीम डिजिटल
टीम डिजिटल Updated Fri, 01 Nov 2013 01:02 PM IST
विज्ञापन
dhanteras puja yam deepak

आज धनतेरस है, खरीदारी में इतने व्यस्त न हो जाएं कि शाम के समय दीपदान करना भूल जाएं। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस की शाम दीपदान का बड़ा ही महत्व है। माना जाता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु से बचाव होता है।

विज्ञापन


इस संदर्भ में कथा है कि, एक बार यमराज ने यमदूतों से कहा लोगों के प्राण हरते समय तुम्हें कभी दुःख हुआ है अथवा नहीं। इस पर यमदूत ने कहा कि एक बार एक राजकुमार के प्राण हरते समय हमें बहुत दुःख हुआ था। राजकुमार की शादी के चार ही दिन हुए थे।
विज्ञापन


पढ़ें, नवंबर महीने का राशिफल विस्तार से


राजकुमार की मृत्यु से राजमहल में चित्कार और हाहाकार मच गया। नववधू का विलाप देखकर हमारा हृदय हमें धिक्कारने लगा। इसके बाद यमदूतों ने यमराज से पूछा कि हे यमदेव कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे प्राणी की अकाल मृत्यु न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन


यमराज ने कहा कि 'जो व्यक्ति धनतेरस के दिन मेरे नाम से दीप जलाकर मुझे स्मरण करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं सताएगा।'

यमदीप की दूसरी कथा

यमदीप के संदर्भ में एक अन्य कथा भी प्रचलित है कि, प्राचीन काल में एक हिम नामक राजा हुए। विवाह के कई वर्षों बाद इन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। ज्योतिषियों ने जब राजकुमार की कुण्डली देखी तो कहा कि विवाह के चौथे दिन राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजा रानी इस बात को सुनकर दुःखी हो गये। समय बितता गया और राजकुमार की शादी हो गयी। विवाह का चौथा दिन भी आ गया।

राजकुमार की मृत्यु होने के भय से सभी लोग सहमे हुए थे। लेकिन राजकुमार की पत्नी चिंता मुक्त थी। उसे मां लक्ष्मी की भक्ति पर पूरा विश्वास था। शाम होने पर राजकुमार की पत्नी ने पूरे महल को दीपों से सजा दिया। इसके बाद मां लक्ष्मी के भजन गाने लगी।

यमदूत जब राजकुमार के प्राण लेने आये तो मां लक्ष्मी की भक्ति में लीन राजकुमार की पतिव्रता पत्नी को देखकर महल में प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाये। यमदूतों के लौट जाने पर यमराज स्वयं सर्प का रूप धारण करके महल में प्रवेश कर गये।

सर्प बने यमराज जब राजकुमारी के कक्ष के समाने पहुंचे तब दीपों की रोशनी और लक्ष्मी मां की कृपा से सर्प की आंखें चौंधिया गयी और सर्प बने यमराज राजकुमारी के पास पहुंच गये। राजकुमारी के भजनों में यमराज ऐसे खोये की उन्हें पता ही नहीं चला कि कब सुबह हो गयी।


राजकुमार की मृत्यु का समय गुजर जाने के बाद यमराज को खाली हाथ लौटना पड़ा और राजकुमार दीर्घायु हो गया। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन से धनतेरस के दिन यमदीप जलाने की परंपरा शुरू हुई।

ऐसे जलाएं दीपक
शाम के समय नए दीपक में सरसो का तेल भरकर यमराज का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं। दीपक को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रख दें।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed