Christmas Day 2022: आखिर क्यों घरों में सजाया जाता है क्रिसमस ट्री? जानिए क्या है इसका महत्व
Christmas Tree Importance and History: क्रिसमस के दिन लोग एक दूसरे को गिफ्ट देते हैं और केक काटकर क्रिसमस का आनंद उठाते हैं। इस त्योहार में केक और गिफ्ट के अलावा एक और चीज का विशेष महत्व होता है, वह है क्रिसमस ट्री।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Christmas Tree Importance and History: बस कुछ दिनों में क्रिसमस का पर्व आने वाला है। क्रिसमस के पर्व पर प्रभु ईसा का जन्मदिन सद्भाव व प्रेम के साथ पूरी दुनिया में मनाया जाता है। वैसे तो ये ईसाई धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, लेकिन समय के साथ इसे हर धर्म और वर्ग के लोग बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। क्रिसमस के दिन लोग एक दूसरे को गिफ्ट देते हैं और केक काटकर क्रिसमस का आनंद उठाते हैं। इस त्योहार में केक और गिफ्ट के अलावा एक और चीज का विशेष महत्व होता है, वह है क्रिसमस ट्री। हर साल क्रिसमस के पर्व पर लोग घर में क्रिसमस ट्री लगाते हैं। रंग-बिरंगी रोशनी और खिलौनों से इसे सजाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्रिसमस पर्व के दौरान क्रिसमस ट्री का इतना ज्यादा महत्व क्यों होता है? चलिए जानते हैं इसके बारे में...
वार्षिक राशिफल 2023
मेष राशिफल 2023। वृषभ राशिफल 2023 । मिथुन राशिफल 2023 । कर्क राशिफल 2023
सिंह राशिफल 2023 । कन्या राशिफल 2023 । तुला राशिफल 2023 । वृश्चिक राशिफल 2023
धनु राशिफल 2023 । मकर राशिफल 2023 । कुंभ राशिफल 2023 । मीन राशिफल 2023
क्रिसमस ट्री का इतिहास
क्रिसमस ट्री को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, 16वीं सदी के ईसाई धर्म के सुधारक मार्टिन लूथर ने शुरू की थी। कहा जाता है कि मार्टिन लूथर 24 दिसंबर की शाम को एक बर्फीले जंगल से जा रहे थे, जहां उन्होंने एक सदाबहार के पेड़ को देखा। पेड़ की डालियां चांद की रोशनी से चमक रही थीं। इसके बाद मार्टिन लूथर ने अपने घर पर भी सदाबहार का पेड लगाया और इसे छोटे- छोटे कैंडल से सजाया। इसके बाद बाद उन्होंने जीसस क्राइस्ट के जन्मदिन के सम्मान में भी सदाबहार के पेड़ को सजाया और इस पेड़ को कैंडल की रोशनी से प्रकाशित किया।
बच्चे की कुर्बानी की कहानी
क्रिसमस ट्री से जुड़ी एक कहानी 722 ईसवी की भी है। कहा जाता है कि सबसे पहले क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा जर्मनी में शुरू हुई। एक बार जर्मनी के सेंट बोनिफेस को पता चला कि कुछ लोग एक विशाल ओक ट्री के नीचे एक बच्चे की कुर्बानी देंगे। इस बात की जानकारी मिलते ही सेंट बोनिफेस ने बच्चे को बचाने के लिए ओक ट्री को काट दिया। उसी ओक ट्री की जड़ के पास एक फर ट्री या सनोबर का पेड़ उग गया। लोग इस पेड़ को चमत्कारिक मानने लगे। सेंट बोनिफेस ने लोगों को बताया कि यह एक पवित्र दैवीय वृक्ष है और इसकी डालियां स्वर्ग की ओर संकेत करती हैं। मान्यता है कि तब से लोग हर साल जीसस के जन्मदिन पर उस पवित्र वृक्ष को सजाने लगे।
ग्रहण 2023
साल 2023 में कितने ग्रहण
क्रिसमस ट्री का महत्व
प्राचीन काल से ही क्रिसमस ट्री को जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है। इसे ईश्वर की ओर से दिए जाने वाले लंबे जीवन के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता रहा है। मान्यता थी कि इसे सजाने से घर के बच्चों की आयु लम्बी होती है। इसी वजह से हर साल क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री को सजाया जाने लगा।