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Chhath Puja 2021: छठ महापर्व आज, इस शुभ मुहूर्त में दें सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य

Wed, 10 Nov 2021 11:19 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 10 Nov 2021 11:19 AM IST
सार

Chhath Puja 2021: आज बुधवार, 10 नवंबर 2021 को छठ महापर्व मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आज तीसरा दिन है। इसके पहले 08 नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ पर्व आरंभ हो गया था, फिर 09 नवंबर को खरना था। आज छठ महापर्व में शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा।

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Chhath Puja 2021 Shubh Muhurat Puja Vidhi Vrat Arghya Parana Time And Muhurat Significance
छठ पूजा 2021 की हार्दिक शुभकामनाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chhath Puja 2021 Shubh Muhurat, Arghya, Parana Time And Muhurat Significance: आज बुधवार, 10 नवंबर 2021 को छठ महापर्व मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आज तीसरा दिन है। इसके पहले 08 नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ पर्व आरंभ हो गया था, फिर 09 नवंबर को खरना था। आज छठ महापर्व में शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। इसके बाद अगले दिन यानी 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत का संकल्प पूरा होगा। लगातार 36 घंटों तक चलने वाले निर्जला व्रत पूरा होगा। छठ पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। छठ पर्व को कई नामों से जाना जाता है। जैसे डाला छठ, सूर्य षष्ठी और छठ पूजा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व दिवाली के 6 दिनों के बाद मनाया जाता है। छठ का त्योहार मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी माता की पूजा और उपासना का त्योहार है। इसमें व्रत रखने वाला व्यक्ति 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखता है और अपनी संतान की लंबी आयु और अरोग्यता के लिए छठी माता से आशीर्वाद प्राप्त करता है।

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छठ पूजा का तीसरा दिन: षष्ठी पूजा और संध्या अर्घ्य का मुहूर्त और महत्व
छठ महापर्व मुख्य रूप से चार दिनों तक मनाया जाता है। तीसरे दिन छठ मैया की पूजा के लिए प्रसाद बनाया जाता है और सूर्यदेव को शाम के समय यानी सूर्यास्त के समय अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने से पहले शाम को बांस की टोकरी में छठ पूजा में शामिल सभी पूजा सामग्री, फल और पकवान आदि को अर्घ्य के सूप में सजाया कर व्रत रखने वाला व्यक्ति अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देता हैं। अर्घ्य के समय सभी लोग पवित्र नदी के किनारे एकत्र होकर सूर्य देव को जल और दूध चढ़ाते हैं और छठ के प्रसाद से भरे हुए सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है। बाद में छठी माता के गीत और व्रत की कथा सुनकर संतान की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की जाती है।
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छठ पूजा: संध्या अर्घ्य का समय 
छठ पूजा का तीसरा दिन ( 10 नवंबर 2021)
(संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय: शाम 05 बजकर 30 मिनट पर

छठ पूजा का चौथा दिन:
चार दिनों तक चलने वाला छठ महापर्व का आखिरी दिन ऊषा अर्घ्य का दिन होता है। चौथा दिन मुख्य रूप से व्रत का पारण करने का दिन होता है। आखिर दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत पूरा होता है। उगते हुए सूर्य को जल देकर छठी माई और भगवान सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
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उषा अर्घ्य का समय : छठ पूजा का चौथा दिन(11 नवंबर 2021 )
सूर्योदय का समय: सुबह 06 बजकर 40 मिनट पर 

जानिए कौन है छठी मां?
- छठी माता ब्रह्रााजी की मानस पुत्री माना जाता है।
- छठ माता को भगवान सूर्य की बहन भी माना जाता है।
- छठ माता को देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी भी माना गया है।
-संतान की लंबी आयु और आरोग्यता के लिए छठ माता की विशेष पूजा आराधना की जाती है।

छठ व्रत कथा
कथा के अनुसार जब प्रथम मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं हुई, इस कारण वे बहुत दुखी रहने लगे थे।महर्षि कश्यप के कहने पर राजा प्रियव्रत ने एक महायज्ञ का अनुष्ठान संपन्न किया जिसके परिणाम स्वरुप उनकी पत्नी गर्भवती तो हुई लेकिन दुर्भाग्य से बच्चा गर्भ में ही  मर गया। पूरी प्रजा में में मातम का माहौल छा गया। उसी समय आसमान में एक चमकता हुआ पत्थर  दिखाई दिया, जिस पर षष्ठी माता विराजमान थीं। जब राजा ने उन्हें देखा तो उनसे, उनका परिचय पूछा। माता षष्ठी ने कहा कि- मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री हूँ और मेरा नाम षष्ठी देवी है। मैं दुनिया के सभी बच्चों की रक्षक हूं और सभी निःसंतान स्त्रियों को संतान सुख का आशीर्वाद देती हूं। इसके उपरांत राजा प्रियव्रत की प्रार्थना पर देवी षष्ठी ने उस मृत बच्चे को जीवित कर दिया और उसे दीर्घायु का वरदान दिया। देवी षष्ठी की ऐसी कृपा देखकर राजा प्रियव्रत बहुत प्रसन्न हुए। और उन्होंने षष्ठी देवी की पूजा-आराधना की। मान्यता है कि राजा प्रियव्रत के द्वारा छठी माता की पूजा के बाद यह त्योहार मनाया जाने लगा।

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