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Chaturmas 2025: आज से चातुर्मास शुरू, चार माह इन पांच देवताओं की उपासना का है महत्व

Sun, 06 Jul 2025 11:13 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 06 Jul 2025 11:13 AM IST
सार

Chaturmas 2025:  चातुर्मास का पहला महीना श्रावण होता है, जिसे भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माह माना गया है। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाकर शिव की आराधना की जाती है। इस माह से सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत होती है।

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Chaturmas 2025 Why These Four Months Are Best For Worshipping Five Gods
चातुर्मास में भगवान विष्णु चार माह के लिए रहते हैं योग निद्रा में - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Chaturmas 2025:  सनातन धर्म में आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। इन महीनों में श्रीविष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिससे इस समय को तपस्या, व्रत, साधना और संयम का काल माना जाता है। इस काल में यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और जल-वायु में बैक्टीरिया की वृद्धि होती है। इसलिए ऋषि-मुनि और संत महात्मा इस काल में एक ही स्थान पर रहकर ध्यान और प्रवचन करते हैं।
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1. श्रावण मास: शिव भक्ति का सर्वोच्च समय
चातुर्मास का पहला महीना श्रावण होता है, जिसे भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माह माना गया है। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा चढ़ाकर शिव की आराधना की जाती है। इस माह से सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत होती है। भक्तगण शिव सहस्त्रनाम, रुद्राभिषेक और पार्थिव शिवलिंग पूजन कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं। श्रावण में भागवत कथा, व्रत, दान और पूजा से अक्षय पुण्य मिलता है।
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2. भाद्रपद मास: श्रीकृष्ण और गणेश की आराधना
चातुर्मास का दूसरा महीना भाद्रपद है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की पूजा का विशेष महत्व है। इस मास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे बड़े पर्व आते हैं। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मथुरा-वृंदावन में विशेष पूजा-अनुष्ठान होते हैं। गणेश चतुर्थी पर प्रथम पूज्य गणपति की स्थापना कर दस दिवसीय भक्ति महोत्सव मनाया जाता है।
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3. आश्विन मास: मां दुर्गा की उपासना का समय
आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि का पर्व आता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। भक्तजन नौ दिन तक उपवास रखकर कलश स्थापना करते हैं और शक्ति की उपासना में लीन रहते हैं। दशमी को व्रत का पारण कर दशहरे का पर्व मनाया जाता है, जो असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।

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4. कार्तिक मास: पुण्य और दीपोत्सव का माह
कार्तिक मास चातुर्मास का अंतिम और सबसे पुण्यदायी महीना माना गया है। देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और इसी दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस महीने में दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाते हैं। कार्तिक स्नान, दीपदान और तुलसी पूजन विशेष फलदायी माने गए हैं।

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5. अन्य देवताओं की आराधना का महत्व
चातुर्मास के दौरान भगवान शिव, विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण के साथ-साथ हनुमान जी, सूर्य देव, जल देव और वामन अवतार की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस समय संयमित आहार, ब्रह्मचर्य का पालन, सत्संग, भागवत कथा श्रवण और दान-पुण्य से आत्मिक बल की वृद्धि होती है। यह चातुर्मास आत्मशुद्धि, अनुशासन और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है।

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