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जानिए हिंदू धर्म में चरणामृत का महत्व, लाभ और ग्रहण करने के नियम
Sun, 29 Jun 2025 12:28 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 29 Jun 2025 12:28 PM IST
सार
पुराणों के अनुसार, चरणामृत पीने से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है जैसा तीर्थयात्रा, गंगा स्नान या यज्ञ में भाग लेने से मिलता है। यह अल्प प्रयास में अधिक पुण्य देने वाला दिव्य माध्यम है।
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चरणामृत का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सनातन धर्म में पूजा-पाठ के बाद भक्तों को जो अमृतरूपी जल प्रदान किया जाता है, उसे चरणामृत कहा जाता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शास्त्रों और पुराणों में वर्णित एक अत्यंत पुण्यदायक और लाभकारी कृत्य है। चरणामृत का अर्थ है। भगवान के चरणों से प्राप्त अमृत। यह केवल जल से हो सकता है और यह पंचामृत से भी बनता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का समावेश होता है। पूजा के दौरान भगवान की मूर्ति या शिवलिंग का अभिषेक इसी पंचामृत से किया जाता है और वही चरणामृत के रूप में भक्तों को दिया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चरणामृत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के चरणों से गंगा का उद्गम हुआ है। पुराणों के अनुसार भगवान के चरणों का जल सभी तीर्थों से पवित्र माना गया है। इसी प्रकार शिवपुराण में कहा गया है कि भगवान शिव के अभिषेक से प्राप्त जल भी मोक्षदायी होता है। चरणामृत इसीलिए पवित्रता, आध्यात्मिक उन्नति और ईश कृपा का प्रतीक माना जाता है।
चरणामृत पीने के धार्मिक लाभ
1. समस्त तीर्थों का फल प्रदान करता है
पुराणों के अनुसार, चरणामृत पीने से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है जैसा तीर्थयात्रा, गंगा स्नान या यज्ञ में भाग लेने से मिलता है। यह अल्प प्रयास में अधिक पुण्य देने वाला दिव्य माध्यम है।
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गंगा जल की तरह चरणामृत में भी पापों को नष्ट करने की शक्ति होती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि "चरणामृतं पानं पावनं पापनाशनम्।" अर्थात् चरणामृत का पान पवित्र और पाप नाशक है। ज्ञात और अज्ञात दोनों प्रकार के पाप इससे मिट जाते हैं।
3. मन और शरीर की शुद्धि
चरणामृत में प्रयुक्त पंचामृत के सभी पदार्थ आयुर्वेद की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी हैं। दूध शरीर को पोषण देता है, शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, दही पाचन क्रिया को सुधारता है, घी वात-पित्त का संतुलन करता है और शक्कर ताजगी प्रदान करती है। इनका सम्मिलित प्रभाव मानसिक शांति और सात्त्विकता की अनुभूति कराता है।
4. ईश्वर कृपा की प्राप्ति
श्रद्धा से ग्रहण किया गया चरणामृत भक्त के जीवन में ईश्वर की विशेष कृपा को आकर्षित करता है। यह दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित कर सकता है।
ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से चरणामृत का सेवन करने वाले घरों में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। अशांति, रोग और कलह का नाश होता है।
चरणामृत ग्रहण करने के नियम
स्नान या हाथ- पैर धोकर ग्रहण करें: चरणामृत ग्रहण करने से पहले शुद्धता आवश्यक है।
दाहिने हाथ से लें- चरणामृत हमेशा अपने दाएं हाथ से लेना चाहिए क्योंकि यह शुभ माना गया है।
श्रद्धा के साथ पीएं- इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि श्रद्धा और भक्ति भाव से ग्रहण करें।
गिरे हुए चरणामृत को न लें- यदि चरणामृत गिर जाए तो उसे ग्रहण करना वर्जित है।
ग्रहण के बाद मौन धारण करें- कुछ क्षण भगवान का स्मरण करते हुए मौन रहना लाभकारी होता है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार चरणामृत का महत्व
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के चरणों से गंगा का उद्गम हुआ है। पुराणों के अनुसार भगवान के चरणों का जल सभी तीर्थों से पवित्र माना गया है। इसी प्रकार शिवपुराण में कहा गया है कि भगवान शिव के अभिषेक से प्राप्त जल भी मोक्षदायी होता है। चरणामृत इसीलिए पवित्रता, आध्यात्मिक उन्नति और ईश कृपा का प्रतीक माना जाता है।
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चरणामृत पीने के धार्मिक लाभ
1. समस्त तीर्थों का फल प्रदान करता है
पुराणों के अनुसार, चरणामृत पीने से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है जैसा तीर्थयात्रा, गंगा स्नान या यज्ञ में भाग लेने से मिलता है। यह अल्प प्रयास में अधिक पुण्य देने वाला दिव्य माध्यम है।
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2. पापों का क्षय करता हैगंगा जल की तरह चरणामृत में भी पापों को नष्ट करने की शक्ति होती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि "चरणामृतं पानं पावनं पापनाशनम्।" अर्थात् चरणामृत का पान पवित्र और पाप नाशक है। ज्ञात और अज्ञात दोनों प्रकार के पाप इससे मिट जाते हैं।
3. मन और शरीर की शुद्धि
चरणामृत में प्रयुक्त पंचामृत के सभी पदार्थ आयुर्वेद की दृष्टि से अत्यंत गुणकारी हैं। दूध शरीर को पोषण देता है, शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, दही पाचन क्रिया को सुधारता है, घी वात-पित्त का संतुलन करता है और शक्कर ताजगी प्रदान करती है। इनका सम्मिलित प्रभाव मानसिक शांति और सात्त्विकता की अनुभूति कराता है।
4. ईश्वर कृपा की प्राप्ति
श्रद्धा से ग्रहण किया गया चरणामृत भक्त के जीवन में ईश्वर की विशेष कृपा को आकर्षित करता है। यह दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित कर सकता है।
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5. घर में सुख-शांति का आगमनऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से चरणामृत का सेवन करने वाले घरों में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। अशांति, रोग और कलह का नाश होता है।
चरणामृत ग्रहण करने के नियम
स्नान या हाथ- पैर धोकर ग्रहण करें: चरणामृत ग्रहण करने से पहले शुद्धता आवश्यक है।
दाहिने हाथ से लें- चरणामृत हमेशा अपने दाएं हाथ से लेना चाहिए क्योंकि यह शुभ माना गया है।
श्रद्धा के साथ पीएं- इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि श्रद्धा और भक्ति भाव से ग्रहण करें।
गिरे हुए चरणामृत को न लें- यदि चरणामृत गिर जाए तो उसे ग्रहण करना वर्जित है।
ग्रहण के बाद मौन धारण करें- कुछ क्षण भगवान का स्मरण करते हुए मौन रहना लाभकारी होता है।
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