चैत्र नवरात्र: जानें कलश स्थापना की संपूर्ण विधि, मंत्र और महूर्त
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28 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में कलश स्थापना या घटस्थापना का बड़ा महत्व है। कोई भी पूजा तभी सफल होती है जब पूजा विधि-विधान से हो। इसके लिए पूजा विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। इस कलश स्थापना विधि से आप पंडित के बिना भी स्वयं ही पूजा कर सकते हैं।
घटस्थापना/कलश स्थापना की संपूर्ण विधि
कलश स्थापना के लिए पूजन सामग्री
मिट्टी का पात्र (जौ बोने के लिए), जौ बोने के लिए शुद्ध मिट्टी, बोने के लिए जौ, दो कलश (1 शांति कलश और दूसरा पूजा कलश), कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, मौली, इत्र, साबुत सुपारी, दूर्वा, कलश में डालने के लिए सिक्के, पंचरत्न, सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज), सप्तमृत्तिका, सर्वऔषधी, पंचपल्लव, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश ढकने के लिए मिट्टी का दीया, ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल, धूप, दीप, नैवेद्य (मिठाई), फल, लाल रंग का अक्षत (चावल), दूध, दही, घी, शहद, फूल, अगरबत्ती, देवी के लिए वस्त्र पानी वाला नारियल और नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा।
कलश स्थापना विधि
सुबह स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर पूर्वाभिमुख (पूर्व दिशा की ओर मुंह करके) आसन लगाकर बैठें। उसके बाद नीचे दी गई विधि अनुसार पूजा प्रारंभ करें-
घट स्थापना मुहूर्त- सुबह 08:26 से 10:23
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- सुबह 08:26, 28 मार्च 2017
प्रतिपदा तिथि समाप्त- सुबह- 05:44, 29 मार्च 2017
1. नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण कर पूजन सामग्री और अपने शरीर पर जल छिड़कें
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:
2. हाथ में अक्षत, फूल, और जल लेकर पूजा का संकल्प करें।
3. माता शैलपुत्री की मूर्ती के सामने दोनों कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरूण देव का आवाहन करें। बाएं भाग वाला कलश शांति कलश होगा। इसी कलश में सर्वऔषधी, पंचरत्न डालें। दोनों कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते को दूसरे कलश में डालें। इसी कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर उसके ऊपर एक दीया जलाएं। शांति कलश में पंचपल्लव डालकर उसके ऊपर पानी वाला नारियल रखकर लाल वस्त्र से लपेट दें। दोनों कलश के बीच में जौ बो दें।
4. अब नीचे लिखे मंत्र से देवी का ध्यान करें।
खडगं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:।
शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम।।
नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम।
यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥
4. इसके बाद बारी-बारी से पूजन सामग्री, अक्षत धूप, दीप नैवेध और वस्त्र के साथ विधिवत पूजा करें।
5. अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।