Chaitra Mas 2021: धर्म और अध्यात्म के नजरिए से खास होता है चैत्र मास, जानिए क्या करें, क्या न करें
चंद्र कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास वर्ष का पहला महीना होता है इस माह से हिंदू नववर्ष शुरुआत होती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इस साल चैत्र मास की शुरुआत 29 मार्च से हो गई है जो कि 27 अप्रैल तक रहेगा। पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के आखिरी दिन यानी कि पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में होता है इसलिए इस महीने का नाम चैत्र रखा गया है। इस माह से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होने के साथ ही कई व्रत और त्योहार के पड़ते हैं इस वजह से चैत्र मास को भक्ति और संयम का महीना भी कहा जाता है। इस समय मौसम भी बदल रहा होता है, इसलिए यह माह धार्मिक और प्राकृतिक दोनों तरह से महत्वपूर्ण होता है। जानिए इस माह में कौन से कार्य करना रहता है सही और कौन से कार्यों को करने से बचना चाहिए।
चैत्र मास से सर्दियां समाप्त होने लगती है और मौसम गर्म होने लगता है, इसलिए आयुर्वेद और अध्यात्म के अनुसार चैत्र महीने में शीतल जल से स्नान करना आरंभ कर देना चाहिए।
चैत्र माह में भगवान विष्णु और सूर्य की नियमित रूप से पूजा आराधना करनी चाहिए, इसके साथ ही हो सके तो सप्ताह में उपवास भी करना चाहिए।
चैत्र माह में नवरात्रि आती हैं, देवी की आराधना करने के लिए ये दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इसलिए धार्मिक दृष्टि से यह माह बहुत महत्व रखता है। चैत्र मास में सूर्य और देवी की आराधना करने से व्यक्ति के पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
चैत्र महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान, ध्यान और योग करना चाहिए। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा रहता है। इससे व्यक्ति को तनाव से मुक्ति मिलती है और सेहत भी अच्छी रहती है।
आयुर्वेद के अनुसार चैत्र माह में अपने भोजन में अनाज का उपयोग कम से कम करना चाहिए और फलों का सेवन बढ़ा देना चाहिए।
चैत्र महीने से गर्मी बढ़ने लगती है, इसलिए बासी भोजन, खाना बंद कर देना चाहिए। इसके साथ ही प्रतिदिन सोने से पहले हाथ-मुंह जरूर धोना चाहिए।
चैत्र महीने में श्रृंगार भी संतुलित करना चाहिए और हल्के एवं आरामदायक कपड़े पहनना शुरू कर देना चाहिए।