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अरे गजब, इस तरह पैदा हुए झूलेलाल महाराज
राकेश/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 01 Apr 2014 09:04 AM IST
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आज झूलेलाल का अवतरण दिवस यानी जन्मदिन है। इनके जन्म की कथा बड़ी ही रोचक है। कहते हैं सिंध का शासक मिरखशाह अपनी प्रजा पर खूब अत्याचार करता था। इससे दुःखी होकर सिंधी समाज के लोगों ने 40 दिनों तक खूब जप, तप ध्यान किया। इससे प्रसन्न होकर वरुण देव एक मछली के रुप में सिंधु नदी में प्रकट हुए।
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मत्स्य रुप में प्रकट होकर वरुण देव ने कहा कि मैं आज से 40 दिनों बाद चैत्र शुक्ल द्वितीया को जन्म लेकर आप लोगों को मिरखशाह के अत्याचार से मुक्ति दिलाउंगा। ठीक चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन अपने कथन के अनुसार वरुण देव ने एक बालक के रुप में जन्म लिया। इस बालक का नाम उडेरोलाल रखा गया।
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कुछ ही दिनों में यह बालक अपनी प्रतिभा और चमत्कारों के कारण झूलेलाल, लालसांई, के नाम से जाना जाने लगा। इन्हें मुसलमान भी ख्वाजा खिज्र जिन्दह पीर के नाम से पूजते हैं। इनके जन्मदिवस को चेटीचंड के नाम सिंधी समाज बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं।
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