कालभैरव को भगवान शिव की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप माना जाता है। इन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है। वहीं भैरव का दूसरा स्वरूप अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक का है। भगवान भैरव के साधक या उसके परिवार पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने तथा भूत-प्रेत आदि का असर नहीं होता है।
भय को भगाए भैरव : इस उपाय से दूर होंगे राहु के रोड़े और केतु के कष्ट
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Madhukar Mishra
Updated Sun, 17 Mar 2019 11:24 AM IST
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