{"_id":"680dcc22c56ce3408e072d72","slug":"akshaya-tritiya-2025-date-kab-hai-30-april-day-to-accumulate-virtues-and-blessings-2025-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पुण्य और सद्गुणों को सदैव के लिए संचित करने का पावन दिन","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पुण्य और सद्गुणों को सदैव के लिए संचित करने का पावन दिन
Sun, 27 Apr 2025 11:48 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 27 Apr 2025 11:48 AM IST
सार
Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया तिथि की अधिष्ठात्री देवी मां पार्वती हैं। मान्यता है कि इसी दिन उन्होंने इस तिथि को अमोघ फल देने की शक्ति का आशीर्वाद दिया था। इस कारण इस दिन किए गए पुण्य कार्य कभी निष्फल नहीं होते।
विज्ञापन
अक्षय तृतीया का महत्व
- फोटो : adobe
विस्तार
Akshaya Tritiya 2025: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार वैशाख माह में 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी माना गया है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे आम बोलचाल की भाषा में ‘आखातीज’या ‘वैशाख तीज’भी कहा जाता है। मान्यता है कि त्रेता और सतयुग की शुरुआत इसी दिन हुई थी, इसलिए इसे ‘कृतयुगादि तृतीया’भी कहा जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन जो भी धार्मिक कार्य किए जाते हैं जैसे स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय और तर्पण। वे सभी अक्षय फल प्रदान करते हैं। यह तिथि समस्त पापों का नाश करने वाली और सभी प्रकार के सुखों को देने वाली मानी गई है।इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।
तृतीया तिथि का देवी पार्वती से संबंध
इस पवित्र तिथि की अधिष्ठात्री देवी मां पार्वती हैं। मान्यता है कि इसी दिन उन्होंने इस तिथि को अमोघ फल देने की शक्ति का आशीर्वाद दिया था। इस कारण इस दिन किए गए पुण्य कार्य कभी निष्फल नहीं होते। चाहे व्यापार का शुभारंभ हो, गृह प्रवेश हो, विवाह हो या पूजा-पाठ, सब कुछ इस दिन करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति इस दिन अधर्म, अनाचार, या कपट करता है तो उसका फल भी स्थायी रूप से बना रहता है। अतः इस दिन संयम, सदाचार और धर्म का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
विज्ञापन
भगवान से क्षमा याचना और सद्गुणों की प्राप्ति
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन केवल शुभ कार्यों के लिए नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पश्चाताप का भी अवसर है। इस दिन व्यक्ति को अपने द्वारा या अपने परिवारजनों द्वारा जाने-अनजाने में हुए पापों के लिए ईश्वर से क्षमा मांगनी चाहिए। ऐसा करने पर ईश्वर अपराध क्षमा कर सद्गुणों की प्राप्ति करवाते हैं। इस दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में अर्पित कर सद्गुणों की याचना करने की विशेष परंपरा है, जिससे व्यक्ति जीवन में आध्यात्मिक उन्नति करता है।
अक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस दिन पंचांग देखे बिना भी विवाह, गृह प्रवेश, वाहन, भूखंड, आभूषण आदि की खरीदारी जैसे कार्य किए जा सकते हैं। देवी पार्वती ने धर्मराज को बताया कि जो स्त्री सुख की कामना करती है, उसे इस दिन व्रत करते हुए नमक का त्याग करना चाहिए। स्वयं देवी पार्वती ने इसी व्रत को कर भगवान शिव को प्राप्त किया था। विवाह योग्य कन्याओं को उत्तम वर, संतानहीन स्त्रियों को संतान सुख तथा पतिव्रता स्त्रियों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी इंद्राणी को पुत्र जयंत और देवी अरुंधति को महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में उच्च स्थान इसी व्रत के प्रभाव से मिला।
विज्ञापन
तृतीया तिथि का देवी पार्वती से संबंध
इस पवित्र तिथि की अधिष्ठात्री देवी मां पार्वती हैं। मान्यता है कि इसी दिन उन्होंने इस तिथि को अमोघ फल देने की शक्ति का आशीर्वाद दिया था। इस कारण इस दिन किए गए पुण्य कार्य कभी निष्फल नहीं होते। चाहे व्यापार का शुभारंभ हो, गृह प्रवेश हो, विवाह हो या पूजा-पाठ, सब कुछ इस दिन करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति इस दिन अधर्म, अनाचार, या कपट करता है तो उसका फल भी स्थायी रूप से बना रहता है। अतः इस दिन संयम, सदाचार और धर्म का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
विज्ञापन
Akshaya Tritiya: जानिए क्यों इतना खास है अक्षय तृतीया, सुख-समृद्धि के लिए इस दिन करें ये उपाय
विज्ञापन
शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन केवल शुभ कार्यों के लिए नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पश्चाताप का भी अवसर है। इस दिन व्यक्ति को अपने द्वारा या अपने परिवारजनों द्वारा जाने-अनजाने में हुए पापों के लिए ईश्वर से क्षमा मांगनी चाहिए। ऐसा करने पर ईश्वर अपराध क्षमा कर सद्गुणों की प्राप्ति करवाते हैं। इस दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में अर्पित कर सद्गुणों की याचना करने की विशेष परंपरा है, जिससे व्यक्ति जीवन में आध्यात्मिक उन्नति करता है।
Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया पर अपनी राशियों के अनुसार करें इन चीजों का दान और खरीदारी, मिलेंगे शुभ फल
व्रत, मुहूर्त और स्त्रियों के लिए विशेष महत्वअक्षय तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस दिन पंचांग देखे बिना भी विवाह, गृह प्रवेश, वाहन, भूखंड, आभूषण आदि की खरीदारी जैसे कार्य किए जा सकते हैं। देवी पार्वती ने धर्मराज को बताया कि जो स्त्री सुख की कामना करती है, उसे इस दिन व्रत करते हुए नमक का त्याग करना चाहिए। स्वयं देवी पार्वती ने इसी व्रत को कर भगवान शिव को प्राप्त किया था। विवाह योग्य कन्याओं को उत्तम वर, संतानहीन स्त्रियों को संतान सुख तथा पतिव्रता स्त्रियों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी इंद्राणी को पुत्र जयंत और देवी अरुंधति को महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में उच्च स्थान इसी व्रत के प्रभाव से मिला।