अक्षय तृतीया का इसलिए है बड़ा महत्व, आप भी जान लीजिए
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'न क्षयः इति अक्षयः' अर्थात- जिसका क्षय नहीं होता वह अक्षय। मुहूर्त ज्योतिष के अनुसार चंद्रमास और सौरमास के अनुसार तिथियों का घटना-बढ़ना, क्षय होना तय होता है, लेकिन 'अक्षय' तृतीया का कभी भी क्षय नहीं होता। तिथि की अधिष्ठात्री देवी पार्वती हैं।
वे कहती हैं कि जो स्त्री-पुरुष सुख शांति और सफलता चाहतें हैं उन्हें 'अक्षय' तृतीया का व्रत करना चाहिए। व्रत की महत्ता बताते हुए पार्वती कहती हैं, कि यही व्रत करके मैं प्रत्येक जन्म में भगवान् शिव के साथ आनंदित रहती हूं। उत्तम पति की प्राप्ति के लिए भी हर कुंवारी कन्या को यह व्रत करना चाहिए।
अक्षय तृतीय व्रत के लाभ हैं बड़े
प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी ने यही व्रत करके अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रहीं। उन्होंने बिना नमक खाए यह व्रत किया था। व्रती अगर इस दिन यज्ञ, जप-तप, दान-पुण्य करता है उसके जरिए किए गए सत्कर्म का फल अक्षुण रहेगा।
अक्षय तृतीय के दिन करें यह काम मिलेगा लाभ होगी उन्नति
अक्षय तृतीय के दिन भूमिपूजन, व्यापार आरम्भ, गृहप्रवेश, वैवाहिक कार्य, यज्ञोपवीत संस्कार, नए अनुबंध, नामकरण आदि जैसे सभी मांगलिक कार्यों के लिए अक्षय तृतीया वरदान की तरह है। इसदिन रोहिणी नक्षत्र का आरंभ दोपहर 11 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है उससमय अभिजित मुहूर्त भी रहेगा।
इसलिए रोहिणी नक्षत्र के संयोग से दिन और भी शुभ रहेगा। इस दिन भगवान विष्णु की लक्ष्मी सहित गंध, चंदन, अक्षत, पुष्प, धुप, दीप नैवैद्य आदि से पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु के विग्रह को को गंगा जल और अक्षत से स्नान कराएं।
शास्त्रों में इसदिन वृक्षारोपण का भी अमोघ फल बताया गया है। प्रकार अक्षय तृतीया को लगाए गए वृक्ष हरे-भरे होकर पल्लवित पुष्पित होते हैं इसदिन वृक्षारोपण करने वाला व्यक्ति भी कामयाबियों के शिखर छूता चलता है।