{"_id":"592d22fdf7266666052d2eb8559b4d1f","slug":"story-of-panchtantra-hindi-rj","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचतंत्र की इस कहानी में छुपा है जीवन का एक बड़ा रहस्य","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
पंचतंत्र की इस कहानी में छुपा है जीवन का एक बड़ा रहस्य
विष्णुशर्मा
Updated Wed, 25 Nov 2015 01:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वह पक्षी बहुत विचित्र था। उसका धड़ एक ही था, परंतु सिर दो थे। भारुंड़ नाम के उस पक्षी के दो सिर होने के कारण एकता और तालमेल का अभाव था। दोनों एक दूसरे के विपरीत सोचते और काम करते थे। दो सिर होने के कारण भारुंड के दिमाग भी दो थे। नतीजतन टांगें एक कदम पूरब की ओर चलती तो अगला कदम पश्चिम की ओर। ऐसे मं भारूंड स्वयं को वहीं खड़ा पाता था। भारुंड का जीवन दो दिमागों के बीच रस्साकशी बनकर रह गया था।
विज्ञापन
पढ़ें, वास्तुशास्त्र के अनुसार इन 10 कारणों से धन की बरकत नहीं होती
विज्ञापन
एक दिन भारुंड भोजन की तलाश में नदी तट पर धूम रहा था कि एक सिर को नीचे गिरा एक फल नजर आया। उसने चोंच मारकर चखा तो जीभ चटकाने लगा। बोला 'वाह! ऐसा स्वादिष्ट फल तो मैंने आज तक कभी नहीं खाया।'
विज्ञापन
'जरा मैं भी तो चखकर देखूं।' कहकर दूसरे ने उस फल की ओर चोंच बढाई ही थी कि पहले सिर ने झटककर दूसरे सिर को दूर फेंका और बोला 'अपनी चोंच दूर ही रख। यह फल मुझे मिला है और इसे मैं ही खाऊंगा।'
'अरे! हम दोनों एक ही शरीर के भाग हैं। खाने-पीने की चीजें तो हमें बांटकर खानी चाहिए।' दूसरे सिर ने दलील दी। पहला सिर कहने लगा 'ठीक! हम एक शरीर के भाग हैं। पेट हमार एक ही है। मैं इस फल को खाऊंगा, तो वह पेट में ही तो जाएगा और पेट तेरा भी है।'
दोनों में खूब बहस हुई। आखिरकार दूसरे सिर को संतोष करना पड़ा। इस घटना के बाद दूसरे सिर ने बदला लेने की ठान ली और मौके की तलाश में रहने लगा। कुछ दिन बाद फिर भारुंड भोजन की तलाश में घूम रहा था कि दूसरे सिर की नजर एक फल पर पड़ी। उसे जिस चीज की तलाश थी, उसे वह मिल गई थी। दूसरा सिर उस फल पर चोंच मारने ही जा रहा था कि पहले सिर ने चीखकर चेतावनी दी 'अरे, अरे! इस फल को मत खाना। यह विषैला हैं। इसे खाने पर मॄत्यु भी हो सकती है।'
दूसरा सिर बोला, तू चुपचाप अपना काम देख। तुझे क्या लेना है कि मैं क्या खा रहा हूं? भूल गया उस दिन की बात?' पहले सिर ने समझाने कि कोशिश की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। दूसरे सिर ने सारा विषैला फल खा लिया और भारुंड तडप-तडपकर मर गया।