{"_id":"013eff4cea4fe4915d7227b0653058c5","slug":"opportunity-not-return-again-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"करोड़पति बनने का मौका बारबार नहीं आता, इनकी तरह गलती नहीं कीजिएगा","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
करोड़पति बनने का मौका बारबार नहीं आता, इनकी तरह गलती नहीं कीजिएगा
सैमुअल जॉनसन
Updated Sun, 06 Mar 2016 12:54 PM IST
विज्ञापन
हीरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो यात्री पैदल यात्रा कर रहे थे। उनका लक्ष्य था धन और सफलता। उनको एक वर मिला था कि इस यात्रा में उनको असीमित धन मिल सकता है, बशर्ते वे हर कार्य सावधानी से करें। दोनों भोजन, पानी आदि लेकर चल पड़े। काफी थक जाने के बावजूद उन्हें बहुत ही पथरीली सड़क पर चलना पड़ा। वहां कई बोर्ड लगे थे, जिन पर लिखा था, जो इन पत्थरों को उठाएगा, वह अंत में रोएगा। जो इनको नहीं उठायगा, वह भी रोएगा।
विज्ञापन
पढ़ें, इन मंदिरों में मर्दों का जाना वर्जित, महिलाओं को इजाजत
विज्ञापन
एक यात्री ने कहा कि उठाओ, तो रोना पड़ेगा, न उठाओ, तो रोना पड़ेगा, अत: मैं तो प्रयोग के लिए एक छोटा-सा कंकड़ उठाकर जेब में डाल लेता हूं। दूसरा बोला कि कैसे भी हो, रोना तो पड़ेगा ही। फिर क्यों यह वजन पालूं?
विज्ञापन
यात्रा कठिन थी, लेकिन किसी तरह वे आखिरी चरण पर पहुंचे, तो सड़क एकदम अच्छी हो गई। उस सड़क पर एकाध मील और चले होंगे कि बड़े अक्षरों में 'यात्रा समाप्त' लिखा दिख गया। उसके नीचे छोटे अक्षरों में काफी कुछ लिखा था और वह इस प्रकार था: हे यात्री, तुमने जो पत्थर देखे थे, वे अमूल्य हीरे थे।
जिसने एक भी पत्थर नहीं उठाया था, वह बुक्का फाड़कर रोने लगा कि हे प्रभु, मेरे कपड़ों में इतनी जेबें, पीठ पर इतने बड़े थैले थे, लेकिन मैं कैसा बेवकूफ था कि एक भी पत्थर नहीं उठाया। जिसने एक छोटा-सा कंकड़ उठाया था, वह तो इस बीच विक्षिप्त हो चुका था।
बार-बार छाती पीट-पीटकर, बाल नोच-नोचकर वह रो रहा था, हे प्रभु, जब उठाना ही था, तो मैंने सिर्फ एक कंकड़ क्यों उठाया? कम से कम अपना थैला भर सकता था। या अपनी जेब भर सकता था। कुछ नहीं, तो कम से कम एक कौपीन भर के उठा लेता, तो आज मैं क्या से क्या होता!