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Vivah Panchami 2024: शुभ योग में विवाह पंचमी, इन पांच उपायों से दांपत्य जीवन में आएगी खुशहाली

Wed, 04 Dec 2024 12:36 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 04 Dec 2024 12:36 PM IST
सार

Vivah Panchami Upay: साल के आखिरी माह यानी दिसंबर की शुरूआत हो चुकी है। यह माह कई व्रत-त्योहारों से भरा है, जिनमें विवाह पंचमी प्रमुख है।

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Vivah Panchami 2024 date shubh muhurat and puja vidhi know Upay for marriage problem
Vivah Panchami 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Vivah Panchami Upay: साल के आखिरी माह यानी दिसंबर की शुरूआत हो चुकी है। यह माह कई व्रत-त्योहारों से भरा है, जिनमें विवाह पंचमी प्रमुख है। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होती हैं। हिंदू धर्म में राम-सीता की जोड़ी को आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक माना गया है। उनकी उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी मनाई जाती है। इस बार 6 दिसंबर 2024 को विवाह पंचमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन ध्रुव योग का निर्माण होगा, जो रात 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी बनेगा। इस योग में कुछ खास उपाय करने से दांपत्य जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होती हैं। ऐसे में आइए इनके बारे में जानते हैं।

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विवाह पंचमी पर करें ये पांच खास उपाय

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी पर केले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
  • विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस में दिए गए राम-सीता प्रसंग का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं समाप्त होती हैं। 
  • इस साल विवाह पंचमी पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस योग में माता सीता को सुहाग का सामान अर्पित करने से पति-पत्नी में चल रही खटपट दूर होती है।
  • इस दिन भगवान राम और माता सीता की विधिनुसार पूजा करें। पूजा के समय उन्हें पंचामृत का भोग जरूर लगाएं। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है। 
  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम को केसर भात का भोग लगाने से वह प्रसन्न होते हैं। ऐसे में आप विवाह पंचमी पर उन्हें इसका भोग लगा सकते हैं। इससे रिश्तों में प्रेम और विश्वास बना रहता है।


सीता माता की आरती
सीता माता की आरती
आरति श्रीजनक-दुलारी की। सीताजी रघुबर-प्यारी की।।
जगत-जननि जगकी विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत विहारिणि।
परम दयामयि दीनोद्धारिणि, मैया भक्तन-हितकारी की।।
आरति श्रीजनक-दुलारी की।
सतीशिरोमणि पति-हित-कारिणि, पति-सेवा-हित-वन-वन-चारिणि।
पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि, त्याग-धर्म-मूरति-धारी की।।
आरति श्रीजनक-दुलारी की।।
विमल-कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई।
सुमिरत कटत कष्ट दुखदायी, शरणागत-जन-भय-हारी की।।
आरती श्री जनक-दुलारी की। सीता जी रघुबर-प्यारी की।।
 

भगवान श्री राम की आरती


श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। 
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
छंद 
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
।।सोरठा।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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