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Vijayadashami 2025: आखिर क्यों मनाया जाता है विजयादशमी का पर्व, जानिए पौराणिक मान्यताएं और पूजन विधि

Tue, 30 Sep 2025 05:30 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 30 Sep 2025 05:30 PM IST
सार

Vijayadashami 2025: आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयादशमी या दशहरा पर्व विशेष महत्व रखता है। यह दिन केवल एक उत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और साहस की विजय का प्रतीक माना जाता है।

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Vijayadashami 2025 kyu manaya jata hai Know history Significance celebrations of dussehra vijayadashami
दशहरा क्यों मनाया जाता है जानिए इसके पीछे की वजह - फोटो : adobe

विस्तार

Vijayadashami 2025: सनातन धर्म में आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयादशमी या दशहरा पर्व विशेष महत्व रखता है। यह दिन केवल एक उत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और साहस की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं में इस पर्व का स्थान अत्यंत ऊंचा है।
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पौराणिक मान्यता
रामायण के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया और माता सीता को बंधन से मुक्त कराया था। यह घटना धर्म और अधर्म के बीच हुए संघर्ष का प्रतीक मानी जाती है। इसीलिए दशहरे पर रावण दहन की परंपरा है, जिससे यह संदेश मिलता है कि बुराई कितनी भी बलवान क्यों न हो, अंततः उसका नाश निश्चित है।
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एक अन्य कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर राक्षस से युद्ध किया और दशमी तिथि को उसका वध कर देवताओं को पुनः स्वर्ग का अधिकार दिलाया। इसीलिए यह पर्व शक्ति की उपासना और विजय का प्रतीक भी कहलाता है।

महाभारत की कथा में वर्णन मिलता है कि पांडवों ने अपना शस्त्र शमी वृक्ष में छुपाया था। अज्ञातवास की समाप्ति पर दशमी के दिन अर्जुन ने शमी वृक्ष से शस्त्र निकालकर युद्ध किया और विजय प्राप्त की। तभी से इस दिन शमी पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है।

विजयादशमी पर्व का महत्व
विजयादशमी को नया कार्य आरंभ करने, व्यापार शुरू करने और यात्रा के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। इस दिन शस्त्र और वाहन की पूजा करने से साहस और सफलता प्राप्त होती है। शमी वृक्ष की पूजा से धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह पर्व आत्मविश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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विजयादशमी पूजन विधि
विजयादशमी के दिन प्रातः स्नान के बाद घर के देवस्थान को सजाकर भगवान श्रीराम और माता दुर्गा की पूजा करें। माँ दुर्गा को लाल पुष्प, चुनरी, श्रृंगार की वस्तुएँ और नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। भगवान श्रीराम की पूजा कर उनके जीवन की आदर्श कथाओं का स्मरण करना चाहिए।

इस दिन शमी वृक्ष का पूजन कर उसके पत्तों को तिलक लगाकर घर लाना शुभ माना जाता है। शस्त्र और वाहन को धोकर उन पर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर दीपक जलाएँ। इससे घर और जीवन में विजय और मंगल की शक्ति बनी रहती है।

विशेष पूजनीय वस्तुएं
शमी वृक्ष – समृद्धि और विजय का प्रतीक।

आयुध (शस्त्र) – शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक।

वाहन – सुरक्षित यात्रा और सफलता के लिए।

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम – धर्म, शक्ति और सत्य की विजय के प्रतीक।

विजयादशमी का पर्व हमें यह शिक्षा देता है कि असत्य और अधर्म चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, धर्म और सत्य की विजय निश्चित है। यह दिन शक्ति, साहस और धार्मिकता के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।

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