{"_id":"68dcefc2e8fc6ca8320ff11d","slug":"vijayadashami-2025-importance-significance-of-paan-neelkand-and-shami-puja-celebrations-of-dussehra-2025-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Vijayadashami 2025: जानिए आखिर क्यों दशहरे पर पान, नीलकंठ और शमी पूजा का होता है महत्व ?","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Vijayadashami 2025: जानिए आखिर क्यों दशहरे पर पान, नीलकंठ और शमी पूजा का होता है महत्व ?
Wed, 01 Oct 2025 02:41 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 01 Oct 2025 02:41 PM IST
सार
Vijayadashami 2025: दशहरे पर तीन चीजों को सर्वाधिक शुभ माना जाता है। विजयादशमी को ज्योतिष में सर्वसिद्धिदायक मुहूर्त कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य में सफलता अवश्य प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विजयादशमी पूजन महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Vijayadashami 2025: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला विजयादशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, धर्म, सत्य और सद्गुणों की विजय का पर्व माना गया है। यह दिन पूरे भारतवर्ष में बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की रक्षा की थी और देवी दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना के बाद दशहरे के दिन विजय का यह पर्व समाज को यह संदेश देता है कि असत्य और अधर्म का अंत निश्चित है। विजयादशमी को ज्योतिष में सर्वसिद्धिदायक मुहूर्त कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य में सफलता अवश्य प्राप्त होती है। यही कारण है कि इस दिन अक्षर लेखन, गृह प्रवेश, नामकरण, अन्न प्राशन, मुंडन, दुकान या घर के निर्माण जैसे मांगलिक कार्य किए जाते हैं।
दशहरे पर तीन चीजों को सर्वाधिक शुभ माना जाता है
1. पान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पान विजय, प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। विजयादशमी के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद का दहन करने के बाद पान का सेवन सत्य की विजय की प्रसन्नता को व्यक्त करता है। इस दिन पान खाना और खिलाना शुभ माना जाता है। साथ ही पान देवी दुर्गा और हनुमान जी को अर्पित करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पान का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के बाद ऋतु परिवर्तन के समय संक्रामक रोगों की संभावना बढ़ जाती है। पान का सेवन पाचन क्रिया को मजबूत करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर शरीर को संक्रमणों से बचाता है।
विज्ञापन
2. नीलकंठ पक्षी दर्शन का महत्व
नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे और उसके बाद ही विजय उनके चरणों में आई। इसलिए विजयादशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन नीलकंठ को देख लेने से जीवन में भाग्य की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही भगवान शिव से मंगलकामना करने पर हर कार्य में सफलता मिलती है।
3. शमी वृक्ष पूजन का महत्व
शमी वृक्ष का महत्व भी विजयादशमी से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल की कथा के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय शमी वृक्ष में ही अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे। बाद में इन्हीं अस्त्र-शस्त्रों को निकालकर उन्होंने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। तभी से इस दिन शमी वृक्ष की पूजा की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि विजयादशमी पर घर की पूर्व दिशा में शमी की टहनी प्रतिष्ठित करके विधिपूर्वक पूजन करने से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। शमी वृक्ष की पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि का आगमन होता है।
विज्ञापन
दशहरे पर तीन चीजों को सर्वाधिक शुभ माना जाता है
1. पान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि पान विजय, प्रेम और सम्मान का प्रतीक है। विजयादशमी के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद का दहन करने के बाद पान का सेवन सत्य की विजय की प्रसन्नता को व्यक्त करता है। इस दिन पान खाना और खिलाना शुभ माना जाता है। साथ ही पान देवी दुर्गा और हनुमान जी को अर्पित करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी पान का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के बाद ऋतु परिवर्तन के समय संक्रामक रोगों की संभावना बढ़ जाती है। पान का सेवन पाचन क्रिया को मजबूत करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर शरीर को संक्रमणों से बचाता है।
विज्ञापन
Dussehra 2025: श्रवण नक्षत्र और रवि योग में मनाया जायेगा विजयादशमी का पर्व, जानें महत्व और मुहूर्त
विज्ञापन
नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे और उसके बाद ही विजय उनके चरणों में आई। इसलिए विजयादशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन नीलकंठ को देख लेने से जीवन में भाग्य की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही भगवान शिव से मंगलकामना करने पर हर कार्य में सफलता मिलती है।
Shami Puja on Vijayadashami: विजयादशमी पर शमी पूजन क्यों करते हैं? जानें इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
3. शमी वृक्ष पूजन का महत्व
शमी वृक्ष का महत्व भी विजयादशमी से जुड़ा हुआ है। महाभारत काल की कथा के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय शमी वृक्ष में ही अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाए थे। बाद में इन्हीं अस्त्र-शस्त्रों को निकालकर उन्होंने कौरवों पर विजय प्राप्त की थी। तभी से इस दिन शमी वृक्ष की पूजा की परंपरा प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि विजयादशमी पर घर की पूर्व दिशा में शमी की टहनी प्रतिष्ठित करके विधिपूर्वक पूजन करने से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। शमी वृक्ष की पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि का आगमन होता है।