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Vasant Panchami 2020: वसंत पचंमी का महत्व और इस विधि से करें मां सरस्वती को प्रसन्न

Wed, 29 Jan 2020 06:48 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 29 Jan 2020 06:48 AM IST
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vasant panchami 2020 saraswati puja vidhi
Basant Panchami 2020

पतझड़ के बाद पेड़-पौधों में नई कोपल, खेतों में स्वर्णिम आभा लिए लहलाती सरसों, वातावरण में भीनी-भीनी सुगंध, बाग़-बगीचों में खिलते रंग-बिरंगे पुष्पों पर मंडराते भंवरे और पक्षियों का मधुर कलरव। यह सब ऋतुओं के राजा वसंत के आगमन का सूचक है। वहीं दूसरी ओर संगीत व विद्या की देवी वीणावादिनी माँ सरस्वती के अवतरण का दिन भी है। वसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यतयाः विद्यारंभ ,नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह-प्रवेश के लिए वसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयकर माना गया है। महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार नामक काव्य में इसे ''सर्वप्रिये चारुतर वसंते'' कहकर अलंकृत किया है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ''ऋतूनां कुसुमाकराः'' अर्थात मैं ऋतुओं में वसंत हूँ कहकर वसंत को अपना स्वरुप बताया है।

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देवी सरस्वती पूजा विधि
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि,वसंत पंचमी के रूप में सर्वविदित है। इस दिन ज्ञान, वाणी और ललित कलाओं की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।सरस्वती पूजन का उद्देश्य जीवन में अज्ञानरुपी अंधकार को दूर  करके  ज्ञान का प्रकाश उत्त्पन्न  करना है। सत्वगुण  से उत्पन्न होने  के कारण इनकी  पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां अधिकांशः  श्वेत वर्ण की होती हैं जैसे श्वेत चन्दन , श्वेत वस्त्र , फूल , दही-मक्खन , सफ़ेद तिल का लड्डू , अक्षत , घृत , नारियल और इसका जल , श्रीफल , बेर इत्यादि। इस दिन सुबह स्नानादि के पश्चात श्वेत अथवा पीले वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक कलश स्थापना करें । श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें । वसंत पंचमी के दिन माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान है। प्रसाद में  माँ को पीले रंग की मिठाई  या खीर का भोग लगाएं । यथाशक्ति ''ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः '' का जाप करें । माँ सरस्वती का बीजमंत्र '' ऐं '' है जिसके उच्चारण  मात्र से ही  बुद्धि विकसित होती है ।
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कामदेव और रति की पूजा का दिन
इस दिन राधा-कृष्ण, कामदेव और देवी रति की भी पूजा की भी परंपरा है। ये चारों नाम सृजन के अधिपति देव या अवतार रहे है। इसलिए वसंत पंचमी को मदनोत्सव भी कहा जाता है। वसंत पंचमी के दिन ही कामदेव और रति ने पहली बार मानव ह्रदय में प्रेम और आकर्षण का संचार किया था। इस  दिन  कामदेव और रति के पूजन का उद्देश्य दांपत्त्य जीवन को सुखमय बनाना है।  माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में पारिवारिक प्रेम, स्नेह, प्रसन्नता आदि में वृद्धि होती है। इनके साथ- साथ भगवान गणेश ,सूर्यदेव ,भगवान विष्णु व शिव-पार्वती की भी पूजा अर्चना करें।
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अक्षर ज्ञान कराने का शुभ दिन
वसंत पंचमी की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का दिन होने से वसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है।स्कूलों एवं शिक्षा संकायों में सरस्वती पूजन किया जाता है तथा ज्ञान वृद्धि के लिए कामना की जाती है।वहीँ गुरुद्वारों में इस दिन राग वसंत में गुरुवाणी के कीर्तन द्वारा श्रद्धालुओं में भावना जागृत की जाती है।


होली का शुभारंभ
बृज क्षेत्र में वसंत पंचमी के दिन से होली का शुभारंभ हो जाता है। चौराहों पर होलिका दहन के लिए लकड़ी एकत्र करने के बाद गुलाल उड़ाया जाता है। जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा तक उमंग के साथ लगातार चलता रहता है।

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