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Utpanna Ekadashi: कब है नवंबर की आखिरी एकादशी? उत्पन्ना एकादशी पर बन रहे हैं कई शुभ योग

Thu, 21 Nov 2024 04:36 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Thu, 21 Nov 2024 04:36 PM IST
सार

मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है, जो विशेष महत्व रखती है। ऐसे में आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी की तिथि और पूजा विधि क्या है...
 

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Utpanna Ekadashi 2024 Know Date Subh Muhurat And Importance News in Hindi
Utpanna Ekadashi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Utpanna Ekadashi 2024 Date: सालभर में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सनातन धर्म के अनुयायियों को एकादशी का व्रत अवश्य रखना चाहिए। माना जाता है कि इस व्रत से सभी प्रकार के कष्ट समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है, जो विशेष महत्व रखती है। एकादशी का व्रत शुरू करने के लिए इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी प्रकट हुई थी, इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी की तिथि और पूजा विधि क्या है...

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उत्पन्ना एकादशी की तिथि और महत्व
मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर को रखा जाएगा। मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 25 नवंबर की रात 2:38 बजे से शुरू होगा और इसका समापन 26 नवंबर की रात 3:12 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 26 नवंबर को ही रखा जाएगा।
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शुभ योग और पूजा का महत्व
इस बार उत्पन्ना एकादशी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। दरअसल इस दिन हस्त नक्षत्र के साथ प्रीति और आयुष्मान योग का निर्माण भी हो रहा है। माना जाता है कि इन शुभ योगों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से अक्षय पुण्य प्राप्ति होती है।
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उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि 

  • इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अनिवार्य है, क्योंकि माना जाता है कि एकादशी का जन्म उन्हीं के शरीर से हुआ है।
  • पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
  • भगवान विष्णु को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करें, क्योंकि तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं किया जाता।
  • इस दिन सत्यनारायण कथा सुनने और पढ़ने से पापों से मुक्ति मिलती है।
  • महिलाएं अपने सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए तुलसी का पूजन करें।
  • उत्पन्ना एकादशी व्रत का पालन करने से न केवल जीवन में सुख-समृद्धि आती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।
     

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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