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Utpanna Ekadashi 2024: कब है उत्पन्ना एकादशी? नवंबर की आखिरी एकादशी से शुरू कर सकते हैं इसका व्रत

Wed, 20 Nov 2024 07:22 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 20 Nov 2024 07:22 AM IST
सार

अभी मार्गशीर्ष माह चल रहा है, जिसमें नवंबर की आखिरी एकादशी आने वाली है। इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा।  

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Utpanna Ekadashi 2024 Margashirsha Ekadashi Date Know Vishnu Puja Benefit
Utpanna Ekadashi - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Utpanna Ekadashi 2024: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विष्णु जी की पूजा का विधान है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रताप से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। हर माह में दो एकादशी आती है। मान्यता के अनुसार एकादशी का व्रत व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है। अभी मार्गशीर्ष माह चल रहा है, जिसमें नवंबर की आखिरी एकादशी आने वाली है। इसे उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा।  

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एकादशी व्रत का महत्व
नवंबर में मार्गशीर्ष माह की उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार धर्मराज युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त दुखों, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाने और हजारों यज्ञों के अनुष्ठान की तुलना करने वाले, चारों पुरुषार्थों को सहज ही देने वाले एकादशी व्रत करने के लिए कहा। तब से इस व्रत को किया जाने लगा, जिसको करने से तमाम कष्ट मिट जाते हैं। एकादशी व्रत शुरू करने के लिए सबसे उत्तम दिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी उत्पन्ना एकादशी को ही माना जाता है। इसलिए इस एकादशी व्रत का विशेष महत्व है।
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उत्पन्ना एकादशी मुहूर्त
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि प्रारम्भ - नवम्बर 26, 2024, प्रात: 01:01 बजे
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त - नवम्बर 27, 2024, प्रात: 03:47 बजे
व्रत पारण मुहूर्त- 27 नवंबर, दोपहर 01:12 बजे से 03:18 बजे तक



एकादशी व्रत के नियम
  • पुराणों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ एकादशी व्रत का पालन करता है, वह मोक्ष का अधिकारी बनता है। व्रत करने वाले को दशमी तिथि से ही संयम और नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए। एकादशी के दिन व्रत रखकर, द्वादशी तिथि को व्रत का पारण किया जाता है।
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  • मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। व्रत के दौरान व्यक्ति को बुरे कर्म करने वालों, पापियों और दुष्ट लोगों की संगत से बचना चाहिए। इसके साथ ही, एकादशी के दिन अन्न का सेवन व्रत के पुण्य को नष्ट कर देता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत हजारों यज्ञों से अधिक फलदायक माना गया है।
  • एकादशी के दिन दान और पुण्य कार्य का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में रात्रि के समय जागरण करते हुए भगवान का ध्यान, भजन और कीर्तन करने का विधान है। जो व्यक्ति इस विधि से व्रत करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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