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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Somvati Amavasya 2024 date and Pitra Dosh upay know Pitra chalisa in hindi

Somvati Amavasya 2024: पितरों की नाराजगी को दूर करने के लिए सोमवती अमावस्या पर करें ये काम

Sun, 22 Dec 2024 06:04 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Sun, 22 Dec 2024 06:04 AM IST
सार

Somvati Amavasya 2024: हर साल 12 अमावस्याएं मनाई जाती हैं, जो सभी पूर्वजों की पूजा-पाठ को समर्पित है, इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैं। 

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Somvati Amavasya 2024 date and Pitra Dosh upay know Pitra chalisa in hindi
Somvati Amavasya 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Somvati Amavasya 2024: हर साल 12 अमावस्याएं मनाई जाती हैं, जो सभी पूर्वजों की पूजा-पाठ को समर्पित है, इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने पर साधक को पाप से मुक्ति प्राप्त होती हैं, इतना ही नहीं मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का वास भी होता है। हर माह की अमावस्या अपना अलग महत्व रखती हैं लेकिन पौष माह में आने वाली अमावस्या को बेहद खास माना जाता है।

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पंचांग के अनुसार इस साल 30 दिसंबर, 2024 सोमवार को पौष अमावस्या पड़ रही है, सोमवार होने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा। इस दिन वृद्धि योग और मूल नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है, इस योग में पिंडदान व महादेव की अर्चना करने से सभी ग्रह दोष और पितृ दोष आदि से छुटकारा मिल सकता है। इस दौरान पितृ चालीसा का पाठ करना न भूलें, इससे पितरों की नाराजगी दूर होती हैं, ऐसे में आइए इस चालीसा के बारे में जानते हैं।

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पितृ चालीसा 

।।दोहा।।

हे पितरेश्वर दे दो आशीर्वाद,

चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।

सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी।

हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी।।

।।चौपाई।।

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर,

चरण रज की मुक्ति सागर ।

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा,

मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।

मातृ-पितृ देव मन जो भावे,

सोई अमित जीवन फल पावे ।

जै-जै-जै पितर जी साईं,

पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा,

संकट में तेरा ही सहारा ।

नारायण आधार सृष्टि का,

पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ।

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते,

भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।

झुंझुनू में दरबार है साजे,

सब देवों संग आप विराजे ।

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा,

कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।

पित्तर महिमा सबसे न्यारी,

जिसका गुणगावे नर नारी ।

तीन मण्ड में आप बिराजे,

बसु रुद्र आदित्य में साजे ।

नाथ सकल संपदा तुम्हारी,

मैं सेवक समेत सुत नारी ।

छप्पन भोग नहीं हैं भाते,

शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।

तुम्हारे भजन परम हितकारी,

छोटे बड़े सभी अधिकारी ।

भानु उदय संग आप पुजावै,

पांच अँजुलि जल रिझावे ।

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे,

अखण्ड ज्योति में आप विराजे ।

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी,

धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।

शहीद हमारे यहाँ पुजाते,

मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा,

धर्म जाति का नहीं है नारा ।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई

सब पूजे पित्तर भाई ।

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा,

जान से ज्यादा हमको प्यारा ।

गंगा ये मरुप्रदेश की,

पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ,

इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।

चौदस को जागरण करवाते,

अमावस को हम धोक लगाते ।

जात जडूला सभी मनाते,

नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है,

जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ।

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी,

सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई,

ता सम भक्त और नहीं कोई ।

तुम अनाथ के नाथ सहाई,

दीनन के हो तुम सदा सहाई ।

चारिक वेद प्रभु के साखी,

तुम भक्तन की लज्जा राखी ।

नाम तुम्हारो लेत जो कोई,

ता सम धन्य और नहीं कोई ।

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत,

नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी,

जो तुम पे जावे बलिहारी ।

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे,

ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे,

सो निश्चय चारों फल पावे ।

तुमहिं देव कुलदेव हमारे,

तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।

सत्य आस मन में जो होई,

मनवांछित फल पावें सोई ।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई,

शेष सहस्त्र मुख सके न गाई ।

मैं अतिदीन मलीन दुखारी,

करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी ।

अब पितर जी दया दीन पर कीजै,

अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै।

।।दोहा।।

पित्तरों को स्थान दो, तीरथ और स्वयं ग्राम ।

श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां, पूरण हो सब काम ।

झुंझनू धाम विराजे हैं, पित्तर हमारे महान ।

दर्शन से जीवन सफल हो, पूजे सकल जहान।।

जीवन सफल जो चाहिए, चले झुंझनू धाम ।

पितृ चरण की धूल ले, हो जीवन सफल महान।।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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