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Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत में करें श्री शिव रुद्राष्टकम का पाठ, योग्य वर का मिलेगा आशीर्वाद

Fri, 02 May 2025 05:51 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Fri, 02 May 2025 05:51 PM IST
सार

वैशाख माह में यह व्रत 9 मई 2025 को रखा जाएगा। इस दिन शुक्रवार का संयोग होने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाएगा। 

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Shukra Pradosh Vrat May 2025 Date shubh yog know Rudrashtakam Stotram Lyrics and Benefits
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shukra Pradosh Vrat May 2025: हिंदू धर्म में शिव जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसके प्रभाव से न केवल जीवन में सुख-समृद्धि बल्कि मनचाहा वर पाने की कामना भी पूरी होती हैं। वैसे तो रोजाना ही महादेव की उपासना की जाती है। लेकिन प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत सबसे शुभ है। इस तिथि पर भगवान शिव को केवल बेलपत्र और शमी के फूल अर्पित करने से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। यह व्रत हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत भी कहते हैं। वैशाख माह में यह व्रत 9 मई 2025 को रखा जाएगा। इस दिन शुक्रवार का संयोग होने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाएगा। इस दिन हस्त नक्षत्र पर वज्र योग का संयोग बन रहा है। इस योग में श्री शिव रुद्राष्टकम का पाठ करने से योग्य वर का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है, साथ ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त भी होती हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली पाठ के बारे में जानते हैं।

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शिव रुद्राष्टकम पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्

निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं
                                                                                                                                 
                                                

                                                                                                                                 
                                                न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो

महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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