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Mangala Gauri Vrat 2023 : आज सावन का पांचवा मंगला गौरी व्रत, जानिए मंगला गौरी व्रत के लाभ और कथा

Tue, 01 Aug 2023 10:31 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 01 Aug 2023 10:31 AM IST
सार

मंगला गौरी व्रत सुहागन स्त्रियां अपने अखंड सुहाग एवं अपने परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए करती हैं। वहीं कुंवारी कन्या अगर गौरी व्रत का धारण करती है तो उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है तथा विवाह में हो रही अड़चन भी दूर हो जाती है।

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Sawan Mangala Gauri Vrat 2023 Date Muhurat Story Vrat Katha Astro Remedies
Maa Mangla Gauri: मंगलवार के दिन मंगला गौरी के साथ-साथ हनुमानजी के चरण से सिंदूर लेकर उसका टीका माथे पर लगाने से मंगल दोष समाप्त हो जाता है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है और सावन का मंगलवार देवी पार्वती की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। सावन के मंगलवार को मंगला गौरी यानि माता पार्वती की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन शिवजी के साथ माता पार्वती की पूजा करने व उपवास रखने से सभी मनोकानाएं शीघ्र पूरी हो जाती हैं।

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मंगला गौरी व्रत करने के लाभ
मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत सुहागन स्त्रियां अपने अखंड सुहाग एवं अपने परिवार में सुख-शांति और समृद्धि के लिए करती हैं। वहीं कुंवारी कन्या अगर गौरी व्रत का धारण करती है तो उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है तथा विवाह में हो रही अड़चन भी दूर हो जाती है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि किसी कन्या का विवाह मांगलिक होने के कारण नहीं हो रहा है या देरी हो रही है तो उसे मंगला गौरी व्रत करने के लिए कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंगलवार के दिन मंगला गौरी के साथ-साथ हनुमानजी के चरण से सिंदूर लेकर उसका टीका माथे पर लगाने से मंगल दोष समाप्त हो जाता है तथा कन्या को जल्दी ही सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।
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मंगला गौरी व्रत कथा
प्राचीन समय में धर्मपाल नामक एक सेठ था, उसके पास धन संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। वह स्वयं सर्व गुण संपन्न था। देवों के देव महादेव का भक्त था। कालांतर में सेठ धर्मपाल की शादी गुणवान वधू से हुई। हालांकि, विवाह के बाद कई वर्षों तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इससे सेठ चिंतित रहने लगा। वह सोचने लगा कि अगर संतान नहीं हुई, तो उसके कारोबार का कौन उत्तराधिकारी होगा? एक दिन सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान के संबंध में किसी प्रकांड पंडित से संपर्क करने की सलाह दी। पत्नी के वचनानुसार, सेठ नगर के सबसे प्रसिद्ध पंडित के पास जाकर मिले। उस समय गुरु ने सेठ दंपत्ति को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करने की सलाह दी। 
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कालांतर में सेठ धर्मपाल की पत्नी ने विधि विधान से महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की। सेठ धर्मपाल की पत्नी की कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन माता पार्वती प्रकट होकर बोली- हे देवी! तुम्हारी भक्ति से मैं अति प्रसन्न हूं, जो वर मांगना चाहते हो! मांगो। तुम्हारी हर मनोकामना अवश्य पूरी होगी। उस समय सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति की कामना की। माता पार्वती ने संतान प्राप्ति का वरदान दिया। हालांकि, संतान अल्पायु था। एक वर्ष पश्चात, धर्मपाल की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया। जब पुत्र का नामकरण किया गया, तो उस समय धर्मपाल ने माता पार्वती के वचन से ज्योतिष को अवगत कराया। तब ज्योतिष ने सेठ धर्मपाल को पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करने की सलाह दी। ज्योतिष के वचनानुसार, सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से की। कन्या के पुण्य प्रताप से धर्मपाल का पुत्र मृत्यु पाश से मुक्त हो गया।

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