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तो इसलिए हर मुसलमान रोजा रखता है
नय्यर हसीन
Updated Mon, 13 Jun 2016 08:08 AM IST
सार
- रमजान के रोजे तमाम मुसलमानों पर फर्ज किए गए हैं
- इबादत का मतलब मालिक का साथ महसूस करना
- रोजा स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी
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रमजान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रमजान के रोजे तमाम मुसलमानों पर फर्ज किए गए हैं। रोजा मनुष्य में आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है। रोजे की हालत में रोजेदार का खुदा पर विश्वास और अधिक मजबूत हो जाता है। साथ ही रोजेदार में आत्मसंयम,आत्म नियंत्रण, धैर्य और परोपकार जैसे गुण स्वत: ही विकसित हो जाते हैं।
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रोजे के जहां आध्यात्मिक फायदे हैं, वहीं शारीरिक तौर पर भी रोजा स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होता है। निश्चित समय पर भोजन लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लेकिन भोजन न करने का कारण शरीर की शुद्धि ही नहीं है। असल मकसद अपने आप की, भीतरी स्थिति की और आसपास के जगत की शुद्धि है। ताकि खुद और समाज को प्रभावित करने वाले अतिवादी परिणाम न हों।
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इबादत का मतलब मालिक का साथ महसूस करना है। मालिक की खूबियां भी इबादत करने वाले में कुछ न कुछ आ ही जाती है। जैसे आग के पास बैठने से गर्मी आती है, वैसे ही खुदा के पैगाम को सुनने या महसूस करने से उसका असर भी आता है। रमजान कुल मिलाकर खुदा के लिए वक्त निकालना है।
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