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Raksha Bandhan 2025: जानिए कैसे शुरू हुई राखी बांधने के परंपरा और क्या है नियम

Tue, 05 Aug 2025 01:16 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 05 Aug 2025 01:16 PM IST
सार

Raksha Bandhan 2025: उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन का दिन भद्रा से मुक्त रहेगा। आइए जानते हैं रक्षाबंधन के त्योहार का पौराणिक महत्व।

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Raksha Bandhan 2025 History of Rakhi Tradition and Rituals Everything Details in Hindi
Raksha Bandhan 2025 - फोटो : adobe stock

विस्तार

Raksha Bandhan 2025: 09 अगस्त को रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार है। यह पर्व हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबंधन के त्योहार को भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और सदभाव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई की आरती उतारते हुए जीवन में सुख-समृद्धि और लंबी आयु की मंगल कामना करती हैं, जिसके बदले में भाई अपनी बहन को भेंट देता है और आजीवन उसकी रक्षा का वचन भी देता है। शास्त्रों में रक्षाबंधन पर अच्छे मुहूर्त और भद्रारहित काल में भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधना शुभ होता है। रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार पूर्ण शुभता और विशेष संयोगों के साथ 9 अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार 9 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन का दिन भद्रा से मुक्त रहेगा।

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राखी बांधने की विधि
भाई की सुख-समृद्धि और जीवन की मंगलकामना के लिए हर वर्ष बहनें श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर रक्षा बंधन का त्योहार मनाती है। रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह से ही तैयारी में लग जाती हैं। रक्षाबंधन के दिन रंगोली से घर को सजाएं। पूजा के लिए एक थाली में स्वास्तिक बनाकर उसमें चंदन, रोली, अक्षत, राखी, मिठाई, और फूल के साथ एक घी का दीया रखें। दीपक प्रज्वलित कर सबसे पहले अपने ईष्टदेव को तिलक लगाकर राखी बांधें और आरती उतारकर मिठाई का भोग लगाएं। फिर भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। इसके बाद उनके सिर पर रुमाल या कोई वस्त्र रखें। अब भाई के माथे पर रोली-चंदन और अक्षत का तिलक लगाकर उसके हाथ में नारियल दें। इसके बाद  "येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:" इस मंत्र को बोलते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। भाई की आरती उतारकर मिठाई खिलाएं और उनके उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए भगवान से प्रार्थना करें। 
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ऐसे शुरू हुई राखी बांधने की परंपरा
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार के रूप में राक्षस राज बलि से तीन पग में उनका सारा राज्य मांग लिया था और उन्हें पाताल लोक में निवास करने को कहा था। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपने मेहमान के रूप में पाताल लोक चलने को कहा। जिसे विष्णुजी मना नहीं कर सके। लेकिन जब लंबे समय तक श्री हरि अपने धाम नहीं लौटे तो लक्ष्मीजी को चिंता होने लगी। तब नारद मुनि ने उन्हें राजा बलि को अपना भाई बनाने की सलाह दी।अपने पति को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी गरीब स्त्री का रूप धारण कर राजा बलि के पास पहुंच गईं और उन्हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी। इसके बदले उन्होंने भगवान विष्णु को पाताल लोक से ले जाने का वचन मांग लिया। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी और माना जाता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा है।

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