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Pitru Paksha 2020 Dates: इस बार श्राद्ध समाप्ति के अगले दिन से नहीं होगी नवरात्रि पूजा, ये है वजह

Thu, 09 Jul 2020 06:10 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 09 Jul 2020 06:10 PM IST
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Pitru Paksha 2020 Dates and significance
पितृ पक्ष 2020 - फोटो : AmarUjala

इस साल श्राद्ध समाप्ति के अगले दिन नवरात्रि का पावन पर्व शुरू नहीं होगा, बल्कि एक महीने बाद शुरू होगा। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इस बार श्राद्ध खत्म होते ही अधिकमास लग जाएगा जिसके कारण नवरात्रि पर्व 28-30 दिन बाद मनाया जाएगा। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस साल दो महीने अधिकमास लग रहे हैं। ऐसा लीप वर्ष होने के कारण हो रहा है। चतुर्मास भी इस साल चार माह की बजाय पांच महीने का होगा। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 160 वर्ष बाद लीप ईयर और अधिकमास एक साथ पड़ रहे हैं। 

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कब से लगेंगे श्राद्ध ?
इस साल श्राद्ध 1 सितंबर से शुरू होंगे और 17 सितंबर को समाप्त होंगे। इसके अगले दिन 18 सितंबर से अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। वहीं नवरात्रि का पावन पर्व 17 अक्टूबर से शुरू होगा और 25 अक्टूबर को समाप्त होगा। वहीं चतुर्मास देवउठनी के दिन 25 नवंबर को समाप्त होंगे। चतुर्मास की समाप्ति के बाद से ही विवाह, मुंडन एवं अन्य प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
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अभी चल रही है चतुर्मास की अवधि
यह चतुर्मास का समय चल रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस समय भगवान विष्णु के पाताल लोक में निद्रासन में आने के बाद वातावरण में नकारात्मक शक्तियां प्रबल हो जाती हैं। शास्त्रों में इससे बचने के लिए एक ही स्थान पर रहकर ईश्वर की साधना करने को बताया गया है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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श्राद्ध का महत्व
पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। यहां श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है। श्राद्ध पक्ष अपने पूर्वजों को जो इस धरती पर नहीं है एक विशेष समय में 15 दिनों की अवधि तक सम्मान दिया जाता है, इस अवधि को पितृ पक्ष अर्थात श्राद्ध पक्ष कहते हैं। हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य का प्रवेश कन्या राशि में होता है तो, उसी दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है।  पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है।

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