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सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजन विधि-मुहूर्त और व्रत से मिलने वाला फल
Tue, 04 Aug 2026 06:54 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 04 Aug 2026 06:54 AM IST
सार
सावन माह में पड़ने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत में देवी पार्वती की पूजा का विधान होता है। इस दिन मां पार्वती की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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मंगला गौरी व्रत 2026
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
04 अगस्त 2026 को सावन माह का पहला मंगला गौरी व्रत है। सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार और मंगलवार का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन जहां भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है तो वहीं मंगलवार का दिन माता पार्वती को समर्पित हैं। सावन माह में पड़ने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत का विधान होता है। इस दिन मां पार्वती की पूजा और उनका आशीर्वाद पाने के लिए खास दिन होता है। सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को है। इस दिन मां गौरी, भगवान शिव और भगवान गणेश की पूजा करने को बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इस बार मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का साया है। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत ती पूजा विधि और मंत्र समेत सभी जानकारियां।
मंगला गौरी व्रत पंचक और भद्रा का साया
इस बार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर पंचक और भद्रा का साया रहेगा। ज्योतिष में पंचक और भद्रा को अच्छा नहीं माना जाता है और इस दौरान किसी भी तरह का शुभ काम करना वर्जित होता है। पंचांग के अनुसार, 4 अगस्त को भद्रा शाम 6 बजकर 33 मिनट से प्रारंभ होगी और समान 5 अगस्त को सुबह 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। वहीं पंचक सुबह 6 बजकर 28 मिनट से शाम 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
मंगला गौरी शुभ संयोग
इस बार मंगला गौरी व्रत पर कई तरह के शुभ संयोगों का निर्माण भी हो रहा है। 4 अगस्त को मंगल गौरी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष में ये योग बहुत ही शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। इस योग में शुभ कार्य करने से सफलता प्राप्त होती है। मंगल गौरी पर सर्वार्थ सिद्धि योग , रवि योग और अमृत सिद्धि योग शाम 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होगा जो 5 अगस्त को सुबह 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
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मंगला गौरी व्रत पर पूजन का मुहूर्त
इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 5 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त शाम 4 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। गोधूललि मुहूर्त रात 09 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल के लिए शाम 4 बजे से लेकर शाम 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन माह में हर मंगलवार को आने वाला मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।Solah Somvar Vrat Katha: सोलह सोमवार व्रत में करें इस कथा का पाठ, पूर्ण होंगे सभी मनोरथ
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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मंगला गौरी व्रत पंचक और भद्रा का साया
इस बार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर पंचक और भद्रा का साया रहेगा। ज्योतिष में पंचक और भद्रा को अच्छा नहीं माना जाता है और इस दौरान किसी भी तरह का शुभ काम करना वर्जित होता है। पंचांग के अनुसार, 4 अगस्त को भद्रा शाम 6 बजकर 33 मिनट से प्रारंभ होगी और समान 5 अगस्त को सुबह 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। वहीं पंचक सुबह 6 बजकर 28 मिनट से शाम 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
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मंगला गौरी शुभ संयोग
इस बार मंगला गौरी व्रत पर कई तरह के शुभ संयोगों का निर्माण भी हो रहा है। 4 अगस्त को मंगल गौरी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष में ये योग बहुत ही शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। इस योग में शुभ कार्य करने से सफलता प्राप्त होती है। मंगल गौरी पर सर्वार्थ सिद्धि योग , रवि योग और अमृत सिद्धि योग शाम 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होगा जो 5 अगस्त को सुबह 6 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
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मंगला गौरी व्रत पर पूजन का मुहूर्त
इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 5 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 26 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त शाम 4 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। गोधूललि मुहूर्त रात 09 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल के लिए शाम 4 बजे से लेकर शाम 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन माह में हर मंगलवार को आने वाला मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।