{"_id":"5ea513802f49452e2a57efbd","slug":"lord-parshuram-jayanti-akshaya-tritiya-2020-puja","type":"story","status":"publish","title_hn":"Parshuram Jayanti: 2020: सात चिरंजीवियों में एक हैं भगवान परशुराम, ऐसे करें उनकी पूजा","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Parshuram Jayanti: 2020: सात चिरंजीवियों में एक हैं भगवान परशुराम, ऐसे करें उनकी पूजा
Sun, 26 Apr 2020 10:22 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 26 Apr 2020 10:22 AM IST
विज्ञापन
परशुराम जयंती 2020: भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों में से एक हैं, जो आज भी कलियुग में विचरण करते हैं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार के रूप में जन्म लिया था। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया है और साथ ही परशुराम जयंती भी है। भगवान परशुराम सात चिरंजीवियों में से एक हैं, जो आज भी कलियुग में विचरण करते हैं।
विज्ञापन
भगवान परशुराम का जन्म ब्राह्राण परिवार में हुआ। ब्राह्राण कुल में पैदा होने के बावजूद भगवान परशुराम का व्यवहार क्षत्रियों जैसा था। गस्सैल स्वभाव होने के नाते इन्होंने इस धरती को 21 बार क्षत्रिय विहीन कर दिया था। भगवान परशुराम शिव जी के परम भक्त है। भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में देवी रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र के रूप में अवतार लिया। भगवान परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन तथा सभी अनाचारी राजाओं का अपने फरसे से वध कर माता पृथ्वी को उनकी हिंसा और क्रूरता से मुक्त कराया।
विज्ञापन
गणेश जी को बनाया एकदंत
कथा के अनुसार, एक बार की बात है जब परशुराम जी अपने आराध्य देव भगवान शिव से मिलने के इच्छा के चलते कैलाश पर पहुंच गए। तब कैलाश में मौजूद शिव पुत्र भगवान गणेश नें उन्हें शिवजी से मिलने नहीं दिया। क्रोधी स्वभाव के चलते उन्होंने क्रोध में आकर अपने फरशे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ डाला। तब से भगवान गणेश एकदंत कहलाए जाते हैं।
विज्ञापन
परशुरामजी की पूजा विधि
परशुराम जयंती के दिन पूजा स्थल पर भगवान परशुरामजी की मूर्ति को रखकर परशुरामजीको चन्दन, तुलसी, कुमकुम, अक्षत,फल-फूल और मिठाई चढ़ाकर भक्ति-भाव से पूजन करना चाहिए। धूपबत्ती,कपूर और शुद्ध घी का दीपक का दीपक प्रज्वलित कर आरती करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार श्री हरि के अवतार विष्णुजी की पूजा-आराधना करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है एवं मनुष्य के जीवन में से संकट दूर होकर उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।