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Devshayani Ekadashi 2019 : जानें श्री विष्णु के पाताल लोक में शयन की कथा एवं इस महाव्रत की पूजा विधि

Fri, 12 Jul 2019 12:12 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
अनीता जैन, वास्तुविद् Published by: Madhukar Mishra Updated Fri, 12 Jul 2019 12:12 PM IST
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देवशयनी एकादशी 2019 - फोटो : Rohit Jha

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मनाभा, आषाढ़ी, हरिशयनी और देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है। शास्त्रानुसार श्री नारायण ने एकादशी का महत्त्व बताते हुए कहा है कि देवताओं में श्री कृष्ण, देवियों में प्रकृति, वर्णों में ब्राह्मण तथा वैष्णवों में भगवान शिव श्रेष्ठ हैं। उसी प्रकार व्रतों में एकादशी व्रत श्रेष्ठ है। 


 

देवशयनी एकादशी की रात में जागरण करके शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक पूजा करने वाले के पुण्य की गणना करने में चतुर्मुख ब्रह्माजी भी असमर्थ हैं। यह एकादशी भगवान सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश करने पर प्रारम्भ होती है और इसके साथ ही भगवान मधुसूदन का शयनकाल शुरू हो जाता है एवं कार्तिक शुक्ल एकादशी को सूर्यदेव के तुला राशि में आने पर भगवान जनार्दन योगनिद्रा से जागते हैं। लगभग चार माह के इस अंतराल को चार्तुमास कहा गया है। 

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धार्मिक ही नहीं विज्ञान की दृष्टि से भी है महत्वपूर्ण 

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देवशयनी एकादशी 2019

धार्मिक दृष्टि से ये चार महीने भगवान विष्णु के निद्राकाल माने जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इस दौरान सूर्य व चंद्र का तेज पृथ्वी पर कम पहुंचता है, जल की मात्रा अधिक हो जाती है, वातावरण में अनेक जीव-जंतु उत्पन्न हो जाते हैं, जो अनेक रोगों का कारण बनते हैं। इसलिए साधु-संत, तपस्वी इस काल में एक ही स्थान पर रहकर तप, साधना, स्वाध्याय व प्रवचन आदि करते हैं। इन दिनों केवल ब्रज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन महीनों में भूमण्डल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर वास करते हैं। 

इस दौरान वर्जित होंगे मांगलिक कार्य

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देवशयनी एकादशी 2019

गरुड़ध्वज जगन्नाथ के शयन करने पर विवाह, यज्ञोपवीत, संस्कार, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, गोदान, गृहप्रवेश आदि सभी शुभ कार्य चार्तुमास में त्याज्य हैं। इसका कारण यह है कि जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर बलि से तीन पग भूमि मांगी, तब दो पग में पृथ्वी और स्वर्ग को श्री हरि ने नाप दिया और जब तीसरा पग रखने लगे तब बलि ने अपना सिर आगे रख दिया।  

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राजा बलि ने भगवान विष्णु से मांगा था यह वरदान 

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देवशयनी एकादशी 2019

भगवान विष्णु ने राजा बलि से प्रसन्न होकर उनको पाताल लोक दे दिया और उनकी दानभक्ति को देखते हुए वर मांगने को कहा। बलि ने कहा -'प्रभु आप सभी देवी-देवताओं के साथ मेरे लोक पाताल में निवास करें।' और इस तरह श्री हरि समस्त  देवी-देवताओं के साथ पाताल चले गए, यह दिन एकादशी (देवशयनी) का था। इस दिन से सभी मांगलिक कार्यों के दाता भगवान विष्णु का पृथ्वी से लोप होना माना गया है। 

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इसलिए भगवान विष्णु करते हैं शयन

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देवशयनी एकादशी 2019

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक अन्य प्रसंग में एक बार 'योगनिद्रा' ने बड़ी कठिन तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया और उनसे प्रार्थना की -'भगवान आप मुझे अपने अंगों में स्थान दीजिए'। लेकिन श्री हरि ने देखा कि उनका अपना शरीर तो लक्ष्मी के द्वारा अधिष्ठित है। इस तरह का विचार कर श्री विष्णु ने अपने नेत्रों में योगनिद्रा को स्थान दे दिया और योगनिद्रा को आश्वासन देते हुए कहा कि तुम वर्ष में चार मास मेरे आश्रित रहोगी। 

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