Karwa Chauth 2025: इस साल कब है करवा चौथ और क्यों मनाया जाता है ? पढ़ें धार्मिक महत्व
Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का पर्व मुख्य रूप उत्तर भारत में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में बड़े ही उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम के समय करवा माता की पूजा और चंद्र दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं।
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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में एक खास त्योहार माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार का हर साल सुहागिन महिलाओं को बेसब्री से इंतजार रहता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है। इसमें सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करते हुए भगवान गणेश, करवा माता और चंद्रमा की पूजा करती है। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सूर्योदय होने पर निर्जला व्रत रखते हुए चंद्रोदय पर चंद्रमा के दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। आइए जानते हैं इस बार कब है करवा चौथ और क्या है इस व्रत का महत्व।
करवा चौथ 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत इस वर्ष 09 अक्तूबर को रात 10 बजकर 54 मिनट पर होगी और इसका समापन 10 अक्तूबर को शाम 07 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयादिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 10 अक्तूबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त 10 अक्तूबर को शाम 05 बजकर 16 मिनट से लेकर 06 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। वहीं 10 अक्तूबर को चंद्रोदय का समय शाम 07 बजकर 42 मिनट पर होगा।
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करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ का पर्व मुख्य रूप उत्तर भारत में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में बड़े ही उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम के समय करवा माता की पूजा और चंद्र दर्शन करने के बाद व्रत का पारण करती हैं। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर दिनभर बिना खाए-पीए व्रत रखते हुए शाम के समय चंद्रमा के दर्शन करने और पूजा से पति की लंबी आयु और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इससे वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
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क्यों मनाया जाता है करवा चौथ
पौराणिक मान्यता के अनुसार पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत की परंपरा सतयुग से चली आ रही है। इसकी शुरुआत सावित्री के पतिव्रता धर्म से हुई। जब यम आए तो सावित्री ने अपने पति को ले जाने से रोक दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से पा लिया। तब से पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत किये जाने लगा। दूसरी कहानी पांडवों की पत्नी द्रोपदी की है। वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर चले गए थे द्रोपदी ने अर्जुन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी। उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के बाद अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए।
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करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं शाम को लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, इस पर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं। एक लोटे में जल भरकर उसके ऊपर श्रीफल रखकर कलावा बांध दें और दूसरा मिट्टी का टोंटीदार करवा लेकर उसमें गेहूं भरकर व ढक्कन में शक्कर भर दें, उसके ऊपर दक्षिणा रखें, रोली से करवे पर स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद धूप, दीप, अक्षत व पुष्प चढाकर भगवान का पूजन करें, पूजा के उपरांत भक्तिपूर्वक हाथ में गेहूं के दाने लेकर चौथमाता की कथा का श्रवण या वाचन करें । तत्पश्चात् रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रदेव को अर्ध्य दें।