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आज है ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत, जाने किस पूजा से पति को मिलेगी लंबी आयु और सुख-समृद्धि का वरदान

Mon, 17 Jun 2019 09:04 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 17 Jun 2019 09:04 AM IST
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jyeshtha purnima vrat on 17 june and puja vidhi
vat savitri vrat
ज्येष्ठ माह के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को पड़ने वाला वट पूर्णिमा का व्रत आज मनाया जा रहा है। वट पूर्णिमा व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से रखा जाता है, जबकि उत्तर भारत में यह व्रत वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता हैं, जो ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। 
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हिंदू धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। इस बार पूर्णिमा सोमवार के दिन पड़ रही है, जिसका काफी महत्व है। संयोग यह है कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी सोमवार के ही दिन पड़ी थी। 15 दिन बाद अब शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा भी सोमवार को पड़ रही है। यह स्नान ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा। ज्येष्ठ मास की समापन पूर्णिमा को ज्येष्ठा नक्षत्र आना ज्योतिष की दृष्टि से बेहद शुभ माना गया है। 
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मान्यता है कि अमावस्या और पूर्णिमा सोमवार को पड़ने से भगवान शिव और चंद्रमा दोनों प्रसन्न होते हैं। इन दोनों की कृपा धरतीवासियों को मिल जाती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा से अगले दिन आषाढ़ मास प्रारंभ होगा, जिसका समापन 16 जुलाई को चंद्र ग्रहण के साथ होगा। वह पूर्णिमा मंगलवार को पड़ेगी। संयोग यह है कि आषाढ़ मास की अमावस्या भी मंगलवार को ही पड़ेगी। 
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ऐसे करें व्रत 
महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं और वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पूजा आराधना करती हैं। एक बांस की टोकरी मे सात तरह के अनाज रखते जिसे कपड़े के दो टुकड़े से ढ़क देते है दूसरी टोकरी में सावित्री की प्रतिमा रखते है फिर वट वृक्ष को जल, अक्षत, कुमकुम से पूजा करती हैं। इसके पश्चात् लाल मौली से वृक्ष के सात बार चक्कर लगाते हुए ध्यान करती हैं। इस पूजन प्रक्रिया के बाद सभी महिलाएं सावित्री की कथा सुनाती है और अपनी क्षमता के अनुसार दान दक्षिणा देते हुए अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। 
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