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Hanuman Jayanti :हनुमानजी के 12 नामों का रोज स्मरण करने से दूर हो जाती है परेशानियां, जीवन में आती हैं खुशियां

Tue, 23 Apr 2024 01:15 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 Apr 2024 01:15 PM IST
सार

हनुमान जी के 108 नाम है। उनमें से प्रमुख  12 नाम हैं। ग्रंथों के अनुसार जो व्यक्ति इन 12  नामों का स्मरण करता है, तो उसके सारे दुःख, सारी तकलीफें और समस्याओं का अंत होता है।

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Hanuman Jayanti 2024 Puja Vidhi Upay Mantra And Chalisa In Hindi
Hanuman Janmotsav 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज हनुमान जयंती के दिन मंगलवार भी है।जो बजरंगबली की आराधना के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा व भाव से  हनुमान जी की पूजा करते हैं बजरंगबली प्रसन्न होकर उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।
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हनुमान जी के 108 नाम है। उनमें से प्रमुख  12 नाम हैं। ग्रंथों के अनुसार जो व्यक्ति इन 12  नामों का स्मरण करता है, तो उसके सारे दुःख, सारी तकलीफें और समस्याओं का अंत होता है। आइए जानते हैं उनके 12 नामों के बारे में और हर नाम के पीछे का एक रहस्य
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हनुमान-
कथा- एक बार जब हनुमान जी बाल अवस्था में सूर्य देव को फल समझकर खाने के लिए उनकी तरफ बढ़ने लगे तब इंद्र देव ने हनुमान जी को रोकने के लिए अपने वज्र से उन पर प्रहार किया था जिसके बाद व्रज के प्रहार से उनकी ठुड्डी टेड़ी हो गई थी। ठुड्डी को हनु कहा जाता है। तभी से उनका नाम हनुमान पड़ गया।
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अंजनीसुत-
कथा- हनुमान जी ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को प्रदोषकाल में जन्म लिया था। इसी कारण से वह अंजनीसुत कहलाए।
वायुपुत्र-
कथा- बजरंगबली का जन्म वायु देव के आशीर्वाद से हुआ था और पवन देव उनके मानस पुत्र भी हैं। इसलिए हनुमान जी का एक नाम वायुपुत्र या पवन पुत्र भी है।
महाबल-
कथा- हनुमान जी अत्यंत बलशाली हैं। ऐसा माना जाता है कि बालि, रावण , भीम, एरावत, इंद्र आदि सभी का बल मिलकर भी हनुमान जी के बल से इनकी तुलना संभव नहीं। हनुमान जी के बल के कारण ही स्वर्ण लंका क्षण भर में राख का ढेर बन गई थी। इसी कारण से हनुमान जी को महाबली भी कहा जाता है।
रामेष्ट-
कथा- हनुमान जी भगवान श्री राम के प्रिय माने जाते हैं। उनके रोम रोम में राम बसे हैं। राम काज में हनुमान जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। इसी कारण से उनका एक नाम रामेष्ट भी पड़ा।
फाल्गुनसखा-
कथा- हनुमान जी को अर्जुन का मित्र माना जाता है। इसके पीछे का तर्क यह है कि फाल्गुन का अर्थ होता है अर्जुन और सखा का अर्थ होता है मित्र। यानी कि वो जो अर्जुन के मित्र हैं। इसके अलावा, महाभारत और भगवद गीता दोनों ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि हनुमान जी ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ पर स्थापित होकर उनकी रक्षा की थी।
पिंगाक्ष-
 कथा- पिंगाक्ष का अर्थ होता है आंखों में हल्के लाल और पीले रंग की परत बनना। हनुमान जी के नेत्रों में भी ऐसी परत बनने का उल्लेख रामायण ग्रंथ में मिलता है। इसी कारण से हनुमान जी का एक नाम पिंगाक्ष भी है।
अमितविक्रम-
कथा- हनुमान जी का एक नाम अमितविक्रम भी है। अमित का अर्थ है अधिक और विक्रम का अर्थ होता है पराक्रमी। हनुमान जी भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। ऐसे में उनके अंदर अथाह बल होना स्वाभाविक है। हनुमान जी ने अपने बल से ऐसे अचंभित कर देने वाले कार्य किये हैं जो देवताओं के बल के भी बाहर है।
उदधिक्रमण-
कथा- उदधिक्रमण का मतलब होता है समुद्र को लांघने वाला। हनुमान जी ने सीता माता की खोज में समुद्र को लांघा था इसलिए उनका एक नाम उदधिक्रमण भी है।
सीताशोकविनाशन-
कथा- इस नाम की रोचक कथा यह है कि जब समुद्र को लांघ हनुमान जी माता सीता के पास पहुंचे थे तब उन्होंने सूक्ष्म रूप रख कर पेड़ की आड़ में खुद को छिपा लिया था। उन्होंने माता सीता को श्री राम से बिछड़ने के शोक में द्रवित देखा। जब माता सीता के समीप कोई भी नहीं था। तब समय का लाभ उठाते हुए उन्होंने माता सीता को अपना परिचय देते हुए खुद को राम दूत बताया जिसके बाद माता सीता का सारा शोक दूर हो गया। इसी वजह से हनुमान जी सीताशोकविनाशन कहलाए।
लक्ष्मण प्राणदाता-
कथा- रामायण के एक खंड में इस घटना का वर्णन मिलता है कि लक्ष्मण जी और मेघनाथ के युद्ध में जब मेघनाथ ने छल से लक्ष्मण जी को आहत कर मूर्छित कर दिया था तब हनुमान जी उनकी रक्षा हेतु संजीवनी बूटी लेकर आए थे जिससे लक्ष्मण जी की जान बचना संभव हो सकता था। इसलिए हनुमान जी को लक्ष्मण प्राणदाता के नाम से भी जाना जाता है।
दशग्रीवदर्पहा-
कथा- दशग्रीव का मतलब होता है रावण और दर्पहा का अर्थ है घमंड तोड़ने वाला। ये तो समूचा जगत जानता है कि महाबली हनुमान ने किस प्रकार अनेकों बार रावण का अहंकार चूर चूर किया था। इसी कारण से उनका एक नाम दशग्रीवदर्पहा पड़ा।

जाप के फायदे-
जो व्यक्ति नित्य नियम से हनुमान जी का नाम लेते हैं, उन्हें इष्ट की प्राप्ति होती है एवं
प्रात: काल सो कर उठते ही बारह नामों को 11 बार लेनेवाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।
दोपहर में हनुमान जी का नाम लेनेवाला व्यक्ति धनवान होता है। संध्या के समय नाम लेनेवाला व्यक्ति पारिवारिक सुखों से तृप्त होता है वहीँ रात्रि को सोते समय नाम लेनेवाले व्यक्ति की शत्रु से जीत होती है।

 
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