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क्या है गोपाष्टमी पर्व का महत्व और कैसे की जाती है गौ पूजा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 14 Nov 2018 06:16 PM IST
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गोपाष्टमी
दिवाली के बाद कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 15 नवंबर को है लेकिन कुछ जगहों पर तिथियों में अंतर होने के कारण गोपाष्टमी 16 नवंबर के दिन भी मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि पर माता यशोदा ने भगवान कृष्ण को पहली बार गायों को चराने के लिए जंगल भेजा था। यशोदा माता भगवान कृष्ण को नहीं भेजना चाहती थी लेकिन भगवान कृष्ण जिद करने लगे। तभी से कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तो गोपाष्टमी मनाई जाने लगी। इस दिन गायों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। गाय पूजन से सभी देवी देवतागण प्रसन्न होते हैं।
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ऐसे मनाएं गोपाष्टमी पर्व
- गोपाष्टमी पर शुभ मुहूर्त में गाय और उसके बछड़े को नहला धुलाकर श्रृंगार किया जाता है।
- गाय को सजाने के बाद उसकी पूजा और परिक्रमा करें।
- परिक्रमा के बाद गाय और उसके बछड़े को घर से कुछ दूर ले जा कर उसके साथ समय बिताएं।
- गोपाष्टमी पर गाय को हरा चारा, हरा मटर एवं गुड़ खिलाएं।
- ऐसी मान्यता है जो व्यक्ति गोपाष्टमी के दिन गाय के नीचे से निकलता उसको बड़ा पुण्य मिलता है।
- शास्त्रों के अनुसार गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास होता है और माता का दर्जा दिया गया है इसलिए गौ पूजन से सभी देवता प्रसन्न होते हैं।