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दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों होती है? पांडवों से जुड़ी इस प्राचीन मान्यता को जानें

Mon, 19 Oct 2026 10:10 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 19 Oct 2026 10:10 PM IST
सार

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका संबंध पांडवों और महाभारत काल की एक प्राचीन कथा से है। जानें विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है और इसका क्या महत्व है।

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Vijayadashami 2026 Shami Tree Worship the Pandavas Story and Its Religious Significance
दशहरा 2026 - फोटो : amar ujala

दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व देशभर में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन जहां कई जगहों पर रावण दहन और रामलीला का आयोजन होता है, वहीं घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। दशहरे से जुड़ी ऐसी ही एक परंपरा है शमी वृक्ष की पूजा। कई क्षेत्रों में इस दिन लोग शमी के पत्ते एक-दूसरे को देते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शमी वृक्ष को विजय, साहस, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन दशहरे पर ही इसकी पूजा करने की परंपरा क्यों है? इसके पीछे महाभारत काल के पांडवों से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा प्रचलित है।

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Vijayadashami 2026 Shami Tree Worship the Pandavas Story and Its Religious Significance
दशहरे पर शमी पूजा का महत्व - फोटो : अमर उजाला

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का क्या महत्व है?
हिंदू धर्म में विजयादशमी को नई शुरुआत और सफलता की कामना से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन शमी वृक्ष की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं का सामना करने की शक्ति मिलती है। इसे साहस, आत्मविश्वास और विजय का प्रतीक भी माना जाता है। दशहरे पर शमी की पूजा का संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत की भावना से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, शमी वृक्ष से जुड़ी धार्मिक कथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न रूपों में प्रचलित हैं। इन परंपराओं में शमी को शुभता और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में विशेष स्थान दिया गया है।

Vijayadashami 2026 Shami Tree Worship the Pandavas Story and Its Religious Significance
महाभारत में पांडवों से जुड़ी है शमी वृक्ष की कथा - फोटो : MetaAI

महाभारत में पांडवों से जुड़ी है शमी वृक्ष की कथा
शमी वृक्ष की पूजा के पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता है। कथा के अनुसार, पांडवों को अपने वनवास के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था। इस दौरान उन्हें अपनी पहचान छिपाकर रहना था। ऐसे में उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र सुरक्षित रखने के लिए उन्हें शमी वृक्ष में छिपा दिया था। मान्यता है कि अज्ञातवास की अवधि पूरी होने के बाद अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने अस्त्र-शस्त्र वापस निकाले और युद्ध के लिए तैयार हुए। इस घटना को पांडवों की शक्ति, साहस और विजय से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से शमी वृक्ष को विजय का प्रतीक माना जाता है और दशहरे के दिन इसकी पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है। यह कथा धार्मिक आस्था और लोकपरंपराओं का हिस्सा है। इसके माध्यम से यह संदेश भी लिया जाता है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना और सही समय आने पर साहस के साथ आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।

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शमी के पत्तों को सोना क्यों माना जाता है? - फोटो : freepik

शमी के पत्तों को सोना क्यों माना जाता है?
दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में प्रचलित है। महाराष्ट्र सहित कुछ स्थानों पर लोग विजयादशमी के दिन शमी के पत्ते अपने रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों को देते हैं। इन्हें प्रतीकात्मक रूप से सोना कहा जाता है। इस परंपरा के पीछे समृद्धि, खुशहाली और आपसी प्रेम की भावना जुड़ी है। लोग शमी के पत्ते देकर एक-दूसरे के सुखद भविष्य की कामना करते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। यहां पत्तों को सोना कहना उनके वास्तविक मूल्य को नहीं, बल्कि शुभता और सम्मान के प्रतीक को दर्शाता है।

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दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा कैसे करें? - फोटो : adobe stock

दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा कैसे करें?

  • सबसे पहले शमी वृक्ष के आसपास की जगह को साफ करें।
  • वृक्ष के पास दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • परिवार की खुशहाली, साहस और कार्यों में सफलता की कामना करें।
  • शमी के पत्ते बांटने की परंपरा हो, तो उन्हें सम्मान और शुभकामना के प्रतीक के रूप में दें।
  • पूजा करते समय पेड़ की छाल या शाखाओं को नुकसान न पहुंचाएं और पत्ते भी सीमित मात्रा में ही लें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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