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दीपावली 2018 : दिवाली पर मां लक्ष्मी संग आती हैं देवी दरिद्रा, रोकने के लिए किए जाते हैं विशेष उपाय

Tue, 06 Nov 2018 01:59 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 06 Nov 2018 01:59 PM IST
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diwali 2018 goddess lakshmi's sister daridra not welcome upay by pepole
देवी दरिद्रा

दीपों के महापर्व पर पूरे देश में साफ-सफाई से लेकर प्रकाश को फैलाने और अंधेरे को दूर करने का क्रम जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर दीवाली पर क्यों विशेष रूप से की जाती है साफ-सफाई और क्यों सजाया जाता है घर? पौराणिक मान्यता के अनुसार दीपों के इस महापर्व पर मां लक्ष्मी अपनी बहन दरिद्रा के साथ भूलोक पर सैर को आती है और जिस घर में साफ-सफाई हो रखी होती है, वहां मां लक्ष्मी निवास करती हैं, जबकि जहां पर गंदगी का वास होता है, वहां उनकी बहन दरिद्रा अपना डेरा डाल देती हैं। यही कारण है कि दीपावली के इस पावन पर्व पर काफी पहले से ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई करना प्रारंभ कर देते हैं। जबकि दीपावली के दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही उठकर महिलाएं मां लक्ष्मी के शुभागमन के लिए घर की साफ-सफाई करके रंगोली, तोरण आदि से सजाती हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी उस घर में आती हैं, जो हर प्रकार से स्वच्छ, सुंदर और प्रकाशयुक्त होता है।

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मां लक्ष्मी की बड़ी बहन हैं दरिद्रा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी दरिद्रा को मां लक्ष्मी की बहन बताया गया है। दरिद्रा को अलक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। इन दोनों देवियों की उत्पत्ति देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से मानी जाती है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने पिया और विष से कंठ नीले पड़ने पर नीलकंठ कहलाए थे। इसके पश्चात् देवी लक्ष्मी और देवी दरिद्रा निकलीं थीं। कहते हैं कि प्राकट्य के समय दोनों एक—दूसरे की ओर पीठ करके बैठी थीं, जिसके कारण इन दोनों के गुण और प्रभाव भी विपरीत हैं। मां लक्ष्मी जी के प्रभाव का मार्ग धन-संपत्ति, प्रगति का होता है वही अलक्ष्मी जी दरिद्रता, पतन,अंधकार का प्रतीक होती है। मां लक्ष्मी का वाहन जहां उल्लू है, वहीं दरिद्रा का वाहन कौआ है। मां लक्ष्मी जहां सद्गुण होते हैं वहां वास करती हैं जबकि देवी दरिद्रा अवगुणों वाले घर में डेरा जमा लेती हैं। मां लक्ष्मी शुभता की प्रतीक हैं तो वहीं देवी दरिद्रा अशुभता लिए आती हैं।
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गांवों में आज भी कायम है परंपरा
दीवाली के दिन मां लक्ष्मी के शुभ आगमन और उनकी बहन दरिद्रा को बाहर निकालने के लिए तमाम तरह की परंपराओं का वर्णन मिलता है। जैसे देश के तमाम हिस्सों में आज भी महिलाएं घर की साफ-सफाई के पश्चात् दरिद्रा को घर से बाहर निकालने के लिए सूप को पीटते हुए घर से बाहर जाने को कहती हैं।

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