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Ganesh Chaturthi 2020: 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी, क्यों प्रिय है गणेशजी को दूर्वा और मोदक

Mon, 17 Aug 2020 02:52 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 17 Aug 2020 02:52 PM IST
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ganesh chaturthi 2020 Why Ganesh ji is pleased by offering Durva and Modak
गणेश चतुर्थी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गणेश चतुर्थी गणेश जन्मोत्सव के रुप में मनाई जाती है। भादप्रद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन गणेश जी के जन्म का दिन माना जाता है। जब तक गणेश जी के उत्सव के दिन चलते हैं तब तक प्रतिदिन उनका पूजन किया जाता है उन्हें मोदक का भोग विशेष तौर पर लगाया जाता है, गणेश चतुर्थी पर ही नहीं बल्कि जब भी गणेश जी की पूजा कि जाती है, दूर्वा का प्रयोग अवश्य किया जाता है। आइए जानते हैं कि गणेश जी को दूर्वा और मोदक इतने प्रिय क्यों हैं। 

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ganesh chaturthi 2020 Why Ganesh ji is pleased by offering Durva and Modak
गणेश चतुर्थी 2020 क्यों लगाया जाता है गणेश जी को मोदक का भोग (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ऋषि अत्रि ने गणेश जी को भोजन पर आमंत्रित किया, अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसूया ने गणेश जी के लिए भोजन लगाया, गणेश जी भोजन करने लगे, लेकिन उनकी भूख शांत ही नहीं हो रही थी, अनुसूया को चिंता होने लगी कि यदि गणेश जी तृप्त नहीं हो पाए तो क्या होगा। घर आए अतिथि को बिना तृप्त किए नहीं लौटा सकते। तब अनुसूया जी ने सोचा कि गणेश जी को खाने के लिए कुछ मीठा दिया जाए। गणेश जी को तृप्त करने के लिए अनुसूया ने मोदक दिए, गणेश जी जैसे ही मोदक खातें मीठे मोदक उनके मुंह में जाकर घुल जाते। मोदक खाकर गणेश जी का मन और पेट दोनों भर गए। वे बहुत प्रसन्न हुए।

इसी तरह से एक कथा मिलती है कि एक बार माता पार्वती ने भी गणेश जी के सामने लड्डू परोसे जिसे देखकर गणेश जी आनंदित हो गए, कहते हैं कि तभी से गणेश जी को लड्डू बहुत प्रिय हैं जो भी उन्हें लड्डू और मोदक का भोग लगाता है गणेश जी प्रसन्न होकर उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।  जानतें हैं कि गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है..

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ganesh chaturthi 2020 Why Ganesh ji is pleased by offering Durva and Modak
गणेश चतुर्थी 2020 क्यों अर्पित की जाती है गणेश जी को दूर्वा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गणेश जी को 21 दूर्वा का गांठे अर्पित करने से वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। कहा जाता है कि एक अगलासुर नाम का एक राक्षस था, उसके प्रकोप से हर जगह त्राहि-त्राहि मची हुई थी। वह ऋषि और मुनियों को जिंदा ही निगल लेता था।

तब सभी ने मिलकर गणेश जी से प्रार्थना की, गणेश जी ने अगला सुर को निगल लिया। लेकिन इस कारण उनके पेट में तेज जलन होने लगी। तब कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा घास की 21 गांठे बनाकर खाने को दी, दूर्वा के औषधिय गुणों से गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से वे प्रसन्न होते हैं। 

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